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Self Love: खुद से शादी रचाना चाहती है यह लड़की, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

क्षमा बिन्दू नाम की लड़की खुद से करेगी शादी...। जानिए क्या कहते हैं मध्यप्रदेश के मनोचिकित्सक डा. सत्यकांत त्रिवेदी...।

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भोपाल

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Manish Geete

Jun 06, 2022

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भोपाल। आपने आपने कई तरह की शादियों के बारे में सुना होगा। जिसमें तमाम तरह के रीति-रिवाजों के साथ दूल्हा-दुल्हन शादी करते हैं। इसके अलावा कुछ शादियां दो युवतियों या दो पुरुषों के बीच भी हो चुकी है। लेकिन, क्या आपने किसी पार्टनर के बगैर शादी करने की बात सुनी है। किसी लड़की के खुद से शादी करने की चर्चा इन दिनों दुनियाभर में हो रही है। सोशल मीडिया पर यह बहस का भी मुद्दा बन गया है, यह ट्रेंडिंग टॉपिक भी बना हुआ है। दरअसल, गुजरात के वडोदरा की क्षमा बिंदु नाम की युवती 11 जून को खुद से ही शादी रचाने जा रही हैं।

इस बारे में मध्यप्रदेश के जाने-माने मनोचिकित्सक (Psychiatrist) डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी भी अपनी बेबाक् राय रखते हैं। आइए जानते हैं डॉ. त्रिवेदी इस मुद्दे को कैसे देखते हैं...।

डा. त्रिवेदी (Dr Satyakant Trivedi) का मानना है कि यह घटना कोई नई नहीं हैं। कई महिलाओं को लगता है कि वह खुद के साथ ज्यादा अच्छे से रह सकती हैं। इसी वजह से वह इस शादी को अपनाती हैं। डा. त्रिवेदी कहते हैं कि व्यक्तिगत रूप से क्षमा बिंदु के बारे में जाने बगैर टिप्पणी करना बेहद गलत होगा। हालांकि सोलोगैमी के मनोविज्ञान (psychology of sologamy) पर मैं ये कह सकता हूँ कि यह घटना बेहद सामान्य घटना से लेकर मन के घावों से भरी हो सकती है। इतिहास के हिसाब से यह नई घटना नहीं है। इसके कई कारण देखने को मिलते हैं कई बार महिलाओं को लगता है कि वो खुद के साथ ज्यादा बेहतर तरीके से रह सकती हैं, उनका और किसी के साथ रहना मुश्किल होगा। सोलोगैमी (sologamy) अपनाकर लड़कियां खुद से और जीवन से जुड़ाव महसूस करती हैं और स्वयं को माफ कर पाना ज्यादा आसान होता है।

आत्मा के घावों में मलहम स्वयं को स्वीकार करके ही लगाया जा सकता है। कई बार रिश्तों में बार बार समस्याएं आना सोलोगैमी की तरफ मोड़ सकता है। बचपन के कटु अनुभव, अत्यधिक प्रशंसा, गुणवत्ता हीन पैरेंटिंग के चलते कई बार स्वयं के प्रति प्यार इतना ज्यादा हो जाता है जिसे हम नारसिससिस्टिक पर्सनालिटी स्वभाव (Narcissistic personality Traits) कहते हैं, इसकी उपस्थिति में भी लोग सोलोगैमी (sologamy) के लिए जा सकते हैं।

एक बात तो तय है कि कोविड के बाद लोगों के जीवन के प्रति नज़रिए में बेहद परिवर्तन देखने को मिल रहा है। पोस्ट कोविड सोलोगैमी (sologamy) के कई मामले देखने को मिल रहे हैं।

देखें वीडियो

क्या है सोलोगैमी मैरिज (Sologamy marriage)

गुजरात की क्षमा बिंदु की वजह से सोलोगैमी (sologamy) शब्द इन दिनों बेहद चर्चा में हैं। गूगल सर्च भी इस शब्द से भरा पड़ा है। इस शब्द का मतलब होता हैं कि खुद से शादी करना। इस मैरिज की एक खास बात है कि इसमें सिर्फ दूल्हा या दुल्हन ही होते हैं। जो स्वयं से ही शादी रचाते हैं। इसे 'सोलोगैमी मैरिज' कहा जाता है। इस शादी को आज के समय पर ज्यादातर लड़कियां ही अपना रही हैं, हालांकि इस शादी को अभी तक भारत में मंजूरी नहीं मिली हैं। सोलोगैमी मैरिज का कॉन्सेप्ट अमेरिका और यूरोप जैसे देशों के लिए कोई नया नहीं हैं, लेकिन भारत के लिए यह नया है। जिस तरह से पॉलोगैमी को बहुविवाह, मोनोगैमी को एक विवाह कहते हैं। उसी तरह सोलोगैमी विवाह को स्व-विवाह कहते है।

कांग्रेस नेता की यह है टिप्पणी

इस मामले पर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं। कोई उन्हें मेंटल, साहसी, बोल्ड तो कोई अटेंशन सीकर बता रहा है। वहीं कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा भी इस मुद्दे पर अपनी राय देते हुए कहते हैं कि वोकनेस पागलपन की सीमा है। यह भारत से जितना दूर रह सके उतना अच्छा है।

कब से हुई सोलोगैमी कि शुरुआत

सोलोगैमी मैरिज की शुरुआत कोई आजकल से नहीं, बल्कि 90 के दशक से हुई थी। उस समय लिंडा बेकर नाम की एक महिला ने खुद से ही शादी की थी। यह पहली मैरिज थी। जिसे सेल्फ मैरिज का दर्जा प्राप्त हुआ। इस शादी में करीब 75 लोग शामिल हुए थे। इसके बाद से ही कई मशहूर सिलेब्स ने सोलोगैमी मैरिज करने का फैसला किया और कोरोना काल के बाद तो इस ट्रेंड में तेजी आ गई।

भारत में नहीं मिली इस शादी को मंजूरी

दुनिया के कई देशों में सेम सेक्स मैरिज को तो मान्यता मिल चुकी है, लेकिन भारतीय समाज में अभी तक इस तरह की शादियों को इजाजत नहीं दी गई है। इसी तरह सोलोगैमी मैरिज भी भारत में अमान्य है।

भारत में कितनी महिलाएं हैं सिंगल?

सिंगल महिलाओं की बात करें तो आज के समय में 2,596 लाख महिलाएं सिंगल हैं। 2021 की जनगणना के अनुसार 2,230 लाख महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने कभी शादी ही नहीं की है। तो वहीं 2011 की जनगणना की बात करें तो भारत में 714 लाख महिलाएं सिंगल थीं। जबकि 2001 में सिंगल लड़कियों की संख्या 512 लाख ही थी। इसमें भी 23% ऐसी लड़कियां हैं जिनकी उम्र 20 से 24 साल की होगी।


मध्यप्रदेश में समलैंगिक शादी

भारत ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश भी समलैंगिक शादी करने में पीछे नहीं रहा। यहां भी कई ऐसे मामले सामने आए जब दो लड़कियों या दो लड़कों ने आपस में शादी कर ली। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के गुना जिले से सामने आया। जहां दो लड़कियों ने घर से भागकर आपस में शादी की थी।