
खामोश प्यार बयां करना मुश्किल है, पर नामुमकिन तो बिल्कुल नहीं
भोपाल. रामकृष्ण रिपरटायर कल्चरल एवं सोशल सोसाइटी संस्था द्वारा संस्कृति संचालनालय के सहयोग तीन दिवसीय रामकृष्ण रंगोत्सव नाट्य समारोह का आगाज शहीद भवन में गुरुवार को नाटक नालायक के मंचन के साथ हुआ। निर्देशन तनवीर अहमद ने किया है। इब्राहिम युसूफ लिखित इस नाटक में मोहब्बत, सियासत, नवाबी तुर्रे और खामोश इश्क की आजिजी और कॉमेडी का मिलाजुला अफसाना दिखाई दिया। अफसाने और नाटक का नयापन, जज्बातों का उतार चढ़ाव और दिलचस्प डायलॉग के साथ सीन क्रिएशन है। निर्देशक ने बताया कि इस नाटक की विशेष बात यह है कि नाटकों में जो एक खास किस्म का फैमिली ड्रामा बनाया किया जाता है जो न सिर्फ दिलचस्प होता है बल्कि इसमें हल्की-फुल्की बातों की चुटकियां और फुहारे भी करती हैं। मोहब्बत एक ऐसा हसीन जज्बा है, जिसे बस महसूस किया जा सकता है। उसकी बयानी जरा मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं।
विकार व नूरी का खामोश इश्क
नाटक में दिखाया गया कि विकार और नूरी का खामोश इश्क है। साथ-साथ फारुक यानी मुन्ने मियां और ब्रिर्जीस की मोहब्बत की दास्तान है। इसके बीच में फरजाना का किरदार हार में धागे का काम करता है। फरजाना हर किरदार को आपस में जोडऩे का काम करती है। अब्बा, खोपरे की मानिंद ऊपर से सख्त अंदर से नरम दिल इंसान हैं। पंसु एक मोटा और कमअक्ल नौकर है। यहां पर सब्जीफरोश चौधरी जानब गफूर खान और मुश्ताक साहब जैसे किरदार भी हैं। विकार सियासत में आना चाहता है। मेयर के लिए इलेक्शन लडऩे की तैयारी कर रहा है और हर कोशिश जायज, नाजायज समझौते करने पर मजबूर है।
फरजाना है अच्छी इंसान
मियां मुनीर पुराने जागीरदार थे। इसलिए उनके अर्दली की बेटी को अम्मा अब्बा के इंतकाल के बाद मियां मुनीर ने बेटी की तरह पाला और वही अहमियत भी दी है। फरजाना घर की सबसे बड़ी बेटी है और अच्छी इंसान है। मुनीर साहब का जागीरदार का रुतबा और दबदबा उनकी बात-बात में गोली मार देने वाली बात में झलकता है। विकार से नूरी खामोश मोहब्बत करती है और अपने दिल का हाल शब्दों में बयां नहीं करती पर अपनी जोड़ी हुई रकम विकार को देना, साथ ही उसकी हार पर गमगीन होना, उसके इश्क की दीवानगी को दिखाता है। लेकिन विकार उसके विचारों का न समझता है और न कद्र करता है।
Published on:
22 Nov 2019 02:00 am
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