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मध्य प्रदेश की पहली ग्रीन बिल्डिंग का सपना टूटा

हरित भवन के कांन्सेप्ट पर बनने वाली प्रदेश की पहली ग्रीन बिल्ंिडग अंतत: बनकर तैयार हो गयी। हालांकि इसे हरित इमारत का खिताब नहीं मिला है। लिंक रोड नंबर-दो पर 2 लाख वर्ग फीट में बने इस भवन का मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लोकार्पण करेंगे। इसमें वन मुख्यालय शिफ्ट होगा।

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भोपाल. हरित भवन के कांन्सेप्ट पर बनने वाली प्रदेश की पहली ग्रीन बिल्ंिडग अंतत: बनकर तैयार हो गयी। हालांकि इसे हरित इमारत का खिताब नहीं मिला है। लिंक रोड नंबर-दो पर 2 लाख वर्ग फीट में बने इस भवन का मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लोकार्पण करेंगे। इसमें वन मुख्यालय शिफ्ट होगा। २७ जुलाई २००८ को इसका भूमिपूजन हुआ था। तीन साल में बन जाना था। लेकिन, अधिकारियों की लापरवाही से १५ साल लग गए। निर्माण कार्य २०१३ में शुरू हुआ। पहले इसकी लागत ८६ करोड़ आंकी गयी थी। लेकिन बनते-बनते १८४ करोड़ खर्च हो गए।
क्या है खास
चार मंजिला भवन में पांच ब्लाक और 80 कक्ष हैं। बजट की कमी न होती, तो यह प्रदेश की पहली ग्रीन बिल्डिंग होती। बिल्डिंग का हर कोना प्राकृतिक रोशनी से रोशन रहे इसलिए इसे ८ आकार का बनाया गया।
क्यों रह गया सपना अधूरा
बजट राशि बढऩे से ग्रीन बिल्डिंग और केंद्रीकृत वातानुकूलन की परिकल्पना समाप्त हो गई। बिल्डिंग में डबल ग्लास वर्क, सोलर पैनल सिस्टम, सेंसर बेस्ड एसी आदि की व्यवस्था होनी थी। लेकिन भूमि अधिग्रहण में देरी आदि से नौबत यह हुई कि बिल्डिंग का एक ब्लॉक बेचना पड़ा।
क्या होती है ग्रीन बिल्डिंग
हरित इमारत पारंपरिक इमारतों की तुलना में कम पानी, ऊर्जा की बचत और कम अपशिष्ट पैदा करती है। यह प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करती है। और रहने वालों के को स्वस्थ माहौल प्रदान करती है। यानी सामग्री, ऊर्जा, पानी और स्वास्थ्य की रक्षा करती है। भारतीय हरित भवन परिषद ग्रीन बिल्डिंग को प्रमाणित करता है।

लोकार्पण कार्ययोजना
वन भवन का लोकार्पण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंगलवार को अपरान्ह तीन बजे करेंगे। इस मौके पर प्रदेश के वनमंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह भी उपस्थित रहेंगे। माना जा रहा है इस अवसर पर मुख्यमंत्री कर्मचारियों के हित की कुछ घोषणाएं भी कर सकते हैं।

प्रदेश की पहली ग्रीन बिल्डिंग

प्रदेश की पहली ग्रीन बिल्डिंग का खिताब राजधानी की एक निजी बिल्ंिडग के नाम है। इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल ने रातीबड़ स्थित आईईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की इमारत को ग्रीन बिल्डिंग का गोल्ड सर्टिफिकेट नौ साल पहले दिया था। इसमें ऊर्जा की 60 और पानी की 55 प्रतिशत बचत हो रही है।
भोपाल नगर निगम की ग्रीन बिल्डिंग का भी ढांचा तैयार हो गया है। दावा किया जा रहा है कि यह देश की पहली नगर निगम ग्रीन बिल्डिंग होगी। इसके तीन ब्लॉक में से दो ब्लॉक तैयार हो चुके, मुख्य ब्लॉक में चार स्लैब के बाद काम पूरा हो जाएगा। मार्च 2024 में इस भवन से नगर निगम का कामकाज संचालित होना शुरू हो जाएगा।
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भारत की पहली हरित इमारत सीआईआई सोहराबजी गोदरेज ग्रीन बिल्डिंग, हैदराबाद थी। जबकि भारत की दस शीर्ष हरित इमारतों में आईटीसी ग्रीन सेंटर, गुडग़ांव, सुजलॉन वन अर्थ, पुणे, पाटनी (आई-गेट) नॉलेज सेंटर, नोएडा, ओलंपिया टेक पार्क, चेन्नई, इन्फिनिटी बेंचमार्क, कोलकाता, क्रिसिल हाउस, मुंबई, इंदिरा पर्यावरण भवन, आईटीसी मौर्य होटल, नई दिल्ली, इन्फोसिस, हैदराबाद और सिस्को बिल्डिंग, बेंगलुरु हैं।

यह हैं अनिवार्यताएं
ग्रीन बिल्डिंग में फ्लाई ऐश की ईंट लगती है। बिल्डिंग में बारिश के पानी का 80 प्रतिशत हिस्सा वाटर हार्वेस्टिंग में कवर होता है। सीमेंट का पीपीसी बैग इस्तेमाल होता है। लोहे का एक प्रतिशत हिस्सा रिसाइकल वाला होता। सोलर वाटर प्लांट और एयर विंड लगती है। कूलिंग वाले उपकरण 5 स्टार रेटिंग के होते हैं। खिड़की के ग्लास डबल गेज वाले होते हैं और छत में हाई एसआरआई पेंट का उपयोग होता है।