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अप्रैल आ गया, प्याऊ लगवाने निगम ने मटके तक नहीं खरीदे, मच्छरों को मारने वाली मशीनें भी खराब

- बाजारों में अस्थायी प्याऊ की व्यवस्था का जिम्मा है निगम का, लेकिन आचार संहिता की उलझन में अब तक कोई कवायद नहीं

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 नगर निगम

नगर निगम भोपाल

भोपाल. इंट्रो- गर्मियों में घर से बाहर ठंडा पानी पिलाने की नगर निगम की आेर से की जाने वाली सरकारी व्यवस्था अब तक कागजों में ही शुरू नहीं हुई। अस्थायी प्याऊ लगवाने मटकों की खरीदी से लेकर शेड बनवाने तक काम नहीं किया जा रहा। इसके साथ गर्मी के साथ मोहल्लो-गलियों में मच्छरों की बढ़ती तादात को नियंत्रित करने के भी निगम के इंतजाम नाकाफी है। बीते साल मैजिक वाहन वाली जो व्हीकल माउंटेड फॉगिंग मशीनें खरीदी थी उनमें से ४० फीसदी खराब है। हैंडहोल्ड फॉगिंग मशीनों में से ७० फीसदी काम नहीं कर रही।

अप्रैल में तो नहीं मिलेगा सरकारी पानी!

आमजन की सुविधा के लिए नगर निगम बाजारों व मुख्यमार्ग, सार्वजनिक स्थलों पर हर साल मार्च के आखिर में ही करीब ५०० अस्थायी प्याऊ शुरू करता है। प्रतिवार्ड कम से कम एक प्याऊ अनिवार्य की जाती है। इसके लिए सेंट्रलाइज एजेंसी तय की जाती है जो मटको की खरीदी से लेकर प्याऊ का शेड लगाने का काम करती है। निगम के इसलिए अस्थायीतौर पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति करता है। इस साल अब तक कुछ नहीं किया गया।

बताया जा रहा है कि आचार संहिता लागू होने की वजह से प्याऊ स्थापना एजेंसी के लिए टेंडर नहीं हो रहे। यानि गर्मियों में बाजार-सार्वजनिक स्थल, मुख्यमार्गों के किनारे लोगों को ठंडा पानी खरीदने अपनी जेब ढीली करना होगी। उन्हें सरकारी स्तर पर एेसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी। जलकार्य प्रभारी चीफ इंजीनियर एआर पंवार का कहना है कि हम इसके लिए काम कर रहे हैं, कम से कम २० दिन और लगेंगे। यानि स्पष्ट है कि अप्रैल माह में तो लोगों को अस्थायी प्याऊ की सुविधा निगम नहीं दे पाएगा।

दो जोन में एक फॉगिंग गाड़ी, उसमें भी आधी खराब

नगर निगम के स्वास्थ्य अमले ने मैजिक वाहन पर लगे व्हीकल माउंटेड फॉगिंग मशीनें दो जोन के बीच एक तय कर रखी है। इसी तरह प्रतिजोन दो मशीनें हैंडहोल्ड है। स्थिति ये हैं कि जोन ३ के पास मैजिक वाली मशीन नहीं है। जोन दस व जोन ११ के बीच एक ही मैजिक फॉगिंग मशीन है। छोटी मशीनें खराब है। जोन दो में मैजिक वाहन की मशीन खराब पड़ी है। जोन १७ में छोटी मशीन अंडर रिपेयरिंग स्टेटस में है। जोन १५ में तो छोटी फॉगिंग मशीन बीते एक साल से खराब है।

अन्य जोन के भी यही हाल है। छोटी मशीनें संकरी गलियों, अंदरूनी क्षेत्रों में जाकर फॉगिंग कर सकती है, लेकिन ये खराब होने से फॉगिंग नहीं हो पा रही। बड़ी मशीनों पर तीन जोन का ही कब्जा है। नौ मशीनों में से तीन मशीनें तो परिवहन शाखा के एसएस रघुवंशी के जिम्मे हैं। तीन से चार मशीनें जोन सात के राजीव सक्सेना के पास है। एेसे में नियमित फॉगिंग नहीं हो पाती। सीएम हेल्पलाइन या निगम की हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत वाले क्षेत्रों में ही इस समय फॉगिंग हो रही है।

ये हैं जिम्मेदार

जलकार्य और स्वास्थ्य के प्रभारी अपर आयुक्त मयंक वर्मा है। इन्हें ही निचले अधिकारियों-कर्मचारियों से जनसुविधा के काम कराने चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति स्पष्ट कर रही है कि काम ठीक नहीं हो रहा। वर्मा फिलहाल स्थिति दिखवाने की बात कह रहे हैं।