
धूम्रपान की लत और धुएं के आस-पास रहने से होता है मैक्यूलर डीजेनरेशन का खतरा.. देखें!
भोपाल। मैक्यूलर डीजेनरेशन नाम की बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य के साथ हर साल 1 मई से 31 मई तक मैक्यूलर अवेयरनेस माह मनाया जाता है। साथ ही 31 मई को वल्र्ड एंटी टोबेको डे भी मनाया जाता है। इस मौके पर एक्सपर्ट बता रहे हैं कि कैसे धूम्रपान से मैक्यूलर डीजेनरेशन जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।
इसका संबंध सीधा आंखों से है, जिसमें आपका रेटिना खराब हो जाता है और आंखों की रोशनी जाने तक का खतरा रहता है। आमतौर पर यह समस्या 60 साल से ऊपर के व्यक्तियों को होती है, लेकिन अगर लाइफस्टाइल ठीक न हो तो कम उम्र में भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। अब शहरी आबादी के बीच इस बीमारी का खतरा बढ़ता जा रहा है।
डॉक्टर्स बताते हैं कि, जो धूम्रपान की लत के शिकार हो या जिन्हें इसके धुएं के आस-पास रहना पड़ता हो, उनमें मैक्यूलर डीजेनरेशन के होने की आशंका अधिक होती है। साथ ही, मोटापा भी इस बीमारी की प्रमुख वजहों में से एक है।
लेजर थेरेपी से हो सकता है नियंत्रण
चिकित्सा जगत में वेट मैक्यूलर डीजेनरेशन का इलाज मौजूद नहीं है। लेकिन ऐसी स्थिति में पढऩे और देखने के लिए मैग्नीफाइंग लेंस का सहारा लिया जा सकता है। इस तरह के वेट (गीले) मैक्यूलर डीजेनरेशन को विटामिन, इंट्राविटरियल एंटी वीइजीएफ़ इंजेक्शन (आंख के विट्रियस भाग में इंजेक्शन), लेजर थैरेपी और दवाओं द्वारा कुछ हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।
ड्राई स्टेज से होती है शुरूआत
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अनुषा आजवानी की सलाह है कि स्वस्थ जीवनशैली, इस रोग से बचने का सबसे कारगर इलाज है। डॉ. अजवानी हृदय से जुड़े रोगों को भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार मानती हैं। बीमारी बढऩे की अवस्था में व्यक्तिको तनाव भी हो सकता है। वे कहती हैं कि मैक्यूलर डीजेनरेशन की शुरूआत ड्राई स्टेज से होती है, जो इलाज के अभाव में वेट स्टेज तक पहुंच सकता है। ऐसे में यह घातक स्वरूप ले लेती है, और आपकी केंद्रीय दृष्टि धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है। इसीलिए इसकी समय पर जांच और रोकथाम आवश्यक होती है।
Published on:
31 May 2018 06:51 pm
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