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अब कम्प्यूटर के माध्यम से होगा फाइलों का मूवमेंट, मंत्रालय में इ-ऑफिस व्यवस्था हुई लागू!

फाइलों का मूवमेंट अब कम्प्यूटर के माध्यम से होगा, मंत्रालय में इ-ऑफिस व्यवस्था...

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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित राज्य मंत्रालय (वल्लभ भवन) में अब कम्प्यूटर से फाइल मूवमेंट होगा। इसके तहत इ-ऑफिस व्यवस्था को सोमवार से लागू किया जाना है। अब मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर विभागों के बाबुओं तक की फाइलें कम्प्यूटर के माध्याम से ही आगे बढ़ेंगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।

सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इ-ऑफिस व्यवस्था के लिए सभी विभागों में तैयारियां हो चुकी हैं। यह कोशिश होगी कि सभी विभागों में सोमवार से फाइलें इ-ऑफिस व्यवस्था के तहत ही आगे बढ़ें। इसके लिए सभी को लॉगिन-पासवर्ड दिए जा चुके हैं।

जानकारी के अनुसार इस व्यवस्था से यह भी पता लगता रहेगा कि फाइल किस स्तर पर कब से लंबित है। वहीं यदि अधिकारी चाहें तो वे सीधे फाइल भी अपने पास बुला सकेंगे। सूत्रों का कहना है कि शुरुआती दिनों में कुछ फाइलें जरूर मौजूदा व्यवस्था से चलेंगी पर एक माह में इ-ऑफिस पूरी तरह लागू हो जाएगा। मंत्रालय के बाद इस व्यवस्था का विस्तार संचालनालय तक किया जाएगा।

इधर, इ-अटेंडेंस को किया स्थगित...
मध्य प्रदेश में नए शिक्षण सत्र की शुरुआत सोमवार (2 अप्रैल) से हो गई है, स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की नए सत्र के साथ इ-अटेंडेंस का प्रावधान किया था। इसका शिक्षक लगातार विरोध कर रहे थे, उसी के मद्देनजर रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इ-अटेंडेस व्यवस्था को फिलहाल स्थगित करने का एलान कर दिया।

राज्य में कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से 62 वर्ष किए जाने पर कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री आवास पर रविवार को मुख्यमंत्री चौहान से मुलाकात कर आभार जताया। इस मौके पर चौहान ने साफ कर दिया कि शिक्षकों की इ-अटेंडेंस प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

शिक्षकों ने विभाग के इ-अटेंडेंस संबंधी फैसले का विरोध किया था। यह प्रक्रिया सोमवार से शुरू होने वाली थी। शिक्षक इस निर्णय को अपमानित करने वाला मान रहे थे।

इस मौके पर चौहान ने कहा कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाए जाने से युवाओं के हित प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि जितने पदों की आवश्यकता होगी, उतनी नई भर्ती की जाएगी। इसके तहत शिक्षक, व्याख्याता, आरक्षक (कांस्टेबल), चिकित्सकों, एएनएम के हजारों पद भरे जाएंगे। इसके साथ ही संविदा कर्मचारियों की महापंचायत बुलाकर नीति बनाई जाएगी।