
tender scam
भोपाल. ई-टेंडर घोटाले में नौ टेंडरों की जांच के दौरान ईओडब्ल्यू को 42 और टेंडरों में टेम्परिंग के सबूत मिले थे। इनकी अब तक जांच नहीं हो सकी है।
ईओडब्ल्यू को इन टेंडरों में टेम्परिंग की पुष्टि के लिए केंद्र सरकार की इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन) से तकनीकी जांच के लिए अगस्त में ही लिख दिया था। सर्ट-इन ने प्राथमिक जांच में इन टेंडरों में टेम्परिंग, हैश वैल्यू और बिड वैल्यू बदलने की पुष्टि की थी, लेकिन अब तक फाइनल तकनीकी जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है। नतीजतन ईओडब्ल्यू की जांच अधर में है। मालूम हो कि सर्ट-इन की रिपोर्ट के बाद ही नौ कंपनियों के खिलाफ ई-टेंडर घोटाले में प्रकरण दर्ज किया था। सूत्रों का कहना है कि सर्ट-इन के जिस अधिकारी ने यह रिपोर्ट तैयार की है, वे अस्वस्थ हैं।
ईओडब्ल्यू ने सर्ट-इन से कई बार संपर्क किया, लेकिन एक ही जवाब मिल रहा है कि जल्द रिपोर्ट भेज दी जाएगी। दिलचस्प बात ये है कि सर्ट-इन ने ईओडब्ल्यू से नए सिरे से तकनीकी जानकारी मांगी थी। इसे भी अक्टूबर में भेजा जा चुका है। अब बताया जा रहा है रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी लंबे अवकाश पर गए हैं।
देरी की ये तो वजह नहीं
संदेह के घेरे में आए 42 टेंडर भाजपा शासनकाल के हैं। विभागीय टेंडर कमेटी, स्टेट फाइनेंस कमेटी, तकनीकी कमेटियों में शामिल मंत्री, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, प्रमुख सचिव, सचिव सहित कई आईएएस अफसरों और टेंडर ओपनिंग अथॉरिटी के जरिए टेंडर प्रक्रिया की गई। कई अफसर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ हैं। दबाव में सर्ट-इन रिपोर्ट को अटकाया जा रहा है।
कई टेंडरों का काम पूरा
ईओडब्ल्यू ने जुलाई 2019 में इन टेंडरों को जांच में शामिल किया था। इसके बाद इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन) से जांच कराने के लिए लिखा। जिन 42 टेंडरों की तकनीकी जांच अटकी हुई है, उनकी स्क्रूटनी 3.50 लाख टेंडरों में से की गई थी।
Published on:
24 Nov 2019 03:29 am
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