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E-Way Bill: राजधानी के व्यापारियों का देशभर में करीब 2000 ट्रक माल अटका

व्यापारियों का कहना है कि ई वे-बिल कैसे डाउनलोड करना है यह बताना तो विभाग भूल ही गया।

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e-way bill

भोपाल। पहले ही दिन ई वे-बिल सिस्टम नहीं चल सका। ऐसे में मजबूर होकर इसका टेस्ट रन टाइम बढ़ाना पड़ा। अब व्यापारी पुराने बिल बिल्टी से माल ला रहे हैं, लेकिन दो दिन की असमंजस्य के बीच मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के व्यापारियों का करीब 2000 ट्रक से ज्यादा माल देश के एक दर्जन से अधिक शहरों में अटक गया है।

अटके हुए माल के मामले में व्यापारियों का कहना है कि ई वे-बिल का ट्रायल रन 15 दिन से चल रहा था, लेकिन इसे कैसे डाउनलोड करना है यह बताना तो विभाग भूल ही गया। इसके चलते व्यापारी बिल डाउनलोड नहीं कर पा रहे थे। वहीं विभाग का कहना है हमने तो व्यापारियों को प्रशिक्षण दिया था, लेकिन साइट पर अधिक लोड होने के कारण वह बार-बार क्रेश हो रही थी।

सूत्रों की मानें तो ई वे-बिल की साइट तैयार करने का काम नेशनल इंफ्रॉमेटिक्स सेंटर कर रही थी। उसके नेटवर्क को लेकर 15 दिन से समस्या आ रही थी। इस समयावधि में जीएसटी काउंसिल कई बार नेटवर्क कमजोर रहने के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तक नहीं कर पाया।

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि स्थिति सामान्य होने में 3 से 5 दिन लग सकते हैं। जिसके चलते किराना सामान और इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टील और सीमेंट की किल्लत हो सकती है। कर सलाहकार और ट्रासंपोर्ट्स का मानना है कि इसमें कम से कम 20 दिन लगेंगे। इसी अनुमान के चलते गुजरात ने राज्य के भीतर लगने वाले इंट्रा स्टेट ई वे-बिल को 21 फरवरी तक टाल दिया है। इस आधार पर इंटर स्टेट ई वे-बिल दोबारा लागू होने में भी इतना समय लगेगा।

रोज आता है 1000 ट्रक माल...
भोपाल में हर रोज आता है एक हजार ट्रक माल
राजधानी में रोजाना 1000 ट्रक माल बाहर से आता है। इसमें 150 ट्रक किराना सामान के हैं। 50 से ज्यादा ट्रक लोहा रोजाना आता है। साथ ही 100 से अधिक वाहन एफएमसीजी उत्पादों के होते हैं। शेष बचे सामान में अनाज-गल्ला, चीनी और फल-सब्जी के होते हैं। एक ही गाड़ी में कई व्यापारियों का माल आता है। जिन व्यापारियों का माल 50 हजार रुपए से कम का होता है, उसके लिए ई वे-बिल ट्रांसपोर्टर्स को खुद जारी करना था। इसके चलते कई उपयोगी सामान के आवगमन पर ई वे-बिल का असर पड़ रहा था।

नहीं हुई डिलीवरी- राजधानी में फ्लिपकॉर्ट और अमेजन जैसी ई कॉमर्स कंपनियों का रोजाना करोड़ों रुपए का सामान आता है।

फॉर्म का पार्ट ए कंपनियों को और पार्ट बी कूरियर कंपनियों को भरना था, लेकिन ई वे-बिल जारी नहीं हो सके। इसलिए दो दिन से बुक किया माल यहां-वहां डिपो में पड़ा रहा।

इस संबंध में भोपाल टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एस कृष्णन का कहना है कि विभाग ने सत्र आयोजित किए थे। इसमें ट्रांसपोर्ट्स को ई वे-बिल डाउनलोड करना बताया गया था, लेकिन पिछले दो दिन की समस्या अलग थी।
वहीं ,भोपाल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक मालपानी का कहना है कि अगर कोई नया कानून आता है तो उस पर काम करने के लिए बकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन ट्रांसपोर्टर्स को ई बिल डाउनलोड करना नहीं सिखाया गया। जो भी प्रशिक्षण सत्र हुए वे सब किताबी थे।