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‘बर्फी’ में प्रियंका ने जो रोल किया वो किरदार करना चाहती है भोपाल की ये ACTRESS

भोपाल की ईशा मानती हैं कि एक अच्छे एक्टर के लिए अच्छा ड्रेसअप, अच्छी हेयरस्टाइल से से ज्यादा जरूरी है टैलेंट।

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sanjana kumar

Jun 24, 2016

Eisha Singh

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भोपाल। अंदाज से नटखट लेकिन अपने गंभीर अभिनय से लोगों को चौंका देने वाली भोपाल की ईशा सिंह जीटीवी के सीरियल 'एक था राजा एक थी रानी' में बतौर रानी दिखाई देने वाली हैं। इससे पहले वे, 'इश्क का रंग सफेद' में भी 'धानी' का किरदार निभा चुकी हैं।

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इसमें उन्होंने पूरे सीरियल में सिर्फ सफेद कपड़ों में ही दर्शकों को अपने अभिनय का लोहा मनवाया था। ईशा का कहना है कि एक अच्छे एक्टर के लिए अच्छा ड्रेसअप, अच्छी हेयरस्टाइल सब बाद में आता है। सबसे ज्यादा जरूरी है टैलेंट। ईशा को हमेशा चैलेंजेस लेना और डिफरेंट रोल करना पसंद हैं।

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अपने बारे वे बताती है कि मैं थोड़ी-थोड़ी 'धानी' जैसी हूं, जो हर गलत चीज के लिए लड़ती है, और थोड़ी-थोड़ी 'रानी' जैसी, जो एकदम बबली और अल्हड़ लड़की।

भोपाल में किया है थिएटर

एक टाइम था जब मेरे दिमाग से एक्टिंग का भूत उतर गया था और मैंने पढ़ाई पर फोकस करना शुरू कर दिया था। पर मैं भोपाल में आलोक चटर्जी, बालेन्द्र सिंह बालू के साथ थिएटर करती थी।

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मिस एमपी बनने के बाद मेरे अंदर का एक्टिंग का कीड़ा फिर उठने लगा। मुझे अगर मौका मिला तो मैं बर्फी की प्रियंका चोपड़ा वाला रोल करना चाहूंगी।

राजा को भी नहीं पहचान पाएगी रानी

सीरियल के बारे में बताती हुई ईशा कहती हैं कि रानी का किरदार धानी से बिल्कुल अलग है। एकदम चुलबुली, नटखट, अल्हड़। सफेद साड़ी से अलग कलरफुल ड्रेसेस पहनने वाली रानी की 12 साल बाद की लाइफ दिखाई जा रही है। रानी अपने राजा से अलग हो गई है और यहां तक कि अब उसे पहचान भी नहीं पाती। जैसे लोगों ने धानी को पसंद किया, ऐसे ही रानी को भी करेंगे।

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जन्मी ईशा बताती हैं कि उन्हें उनके माता-पिता ने हमेशा सपोटज़् किया है। वे जो भी करना चाहती थीं, वो हर काम करने में मेरी प्रेरणा वहीं बने।

बचपन का सपना हुआ सच

ईशा कहती हैं कि बचपन से ही वे एक एक्ट्रेस के रूप में कॅरियर बनाने के बारे में सोचती थीं। पेरेंट्स के सपोटज़् से सपना पूरा हो गया। भोपाल में थिएटर से जुड़ी ईशा प्रियंका चौपड़ा और श्वेता तिवारी को अपनी पे्ररणा मानती हैं। वे कहती हैं कि अगर उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिले तो वे सुशांतसिंह राजपूत के साथ अभिनय करना चाहेंगी।

मां चलाती हैं प्ले स्कूल

ईशा की मां एक प्ले स्कूल संचालित करती हैं। वहीं ईशा ने सबसे ज्यादा समय अपने दादा-दादी के साथ गुजारा है।

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वे कहती है कि उनकी खुशियां और आशीवाज़्द से ही वे इस मुकाम पर पहुंची कि पहले ही सीरियल में उन्हें लीड रोल मिला और आज वे छोटे पदेज़् का सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला चेहरा बन चुकी हैं।

भोपाल के सिवा कुछ पसंद नहीं लेकिन...

भोपाल की हर चीज से बेहद प्यार करने वाली ईशा स्कूलिंग के बाद ही मुंबई चली गईं। ईशा कहती हैं कि भोपाल के अलावा वैसे तो मुझे कभी कुछ पसंद नहीं आया, लेकिन मुंबई एकदम अलग है, बिल्कुल परफेक्ट। मैं ज्यादातर टाइम सेट पर ही बिताती हूं और यहां मुझे यहां बहुत अच्छा लगता है।

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शुरू में मैं नर्वस थी, पर सेट पर सब बहुत कंफर्टेबल फील करवाते हैं। लड़कियों को लगता है कि छोटे कपड़े पहनने और अच्छे लुक्स होने से ही एक्ट्रेस बना जा सकता है। लेकिन, ऐसा बिल्कुल नहीं है। जब तक आप एक्टिंग के लिए पागल नहीं होंगे, आपमें वो जूनून नहीं होगा, आप एक अच्छे एक्टर कभी नहीं बन सकते।

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