
2013 के विधानसभा चुनाव में प्रशिक्षण के बाद भी कर गए चूक
भोपाल। जिन अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी चुनाव में लगाई जाती है, उनके वोट रिजेक्ट हो जाएं तो हैरानी की बात है। 2013 के चुनाव में भोपाल की सात सीटों पर कर्मचारियों ने 11961 पोस्टल वोट किए थे।
इसमें से 2073 वोट निरस्त हो गए। ऐसा गलत जानकारी भरकर भेजने के कारण हुआ। जबकि इन्हें जनता को वोट कराएं का प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही कर्मचारियों को पोस्टल वोट देने की बारीकियां समझाई जाती हैं।
मतदान का प्रतिशत बढ़ाने पर पूरा जोर है, स्वीप की टीमें लगी हुईं हैं। जिन की ड्यूटी चुनाव में लगी है, उन्हें भी शत-प्रतिशत वोटिंग के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।
सुदाम खाडे, जिला निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर
55 फीसदी ने नहीं डाले थे मत
वर्ष 2013 में जिले से करीब 22 हजार अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगी थी, इसमें से 55 फीसदी ने अपने मतों का उपयोग नहीं किया।
इस बार जिले में करीब 36 हजार कर्मचरियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनको दो बार पोस्टल वोट की ट्रेनिंग दिलाई जा चुकी है। अभी दो और सत्रों में ट्रेनिंग कराई जाएगी, ताकि मतदान का प्रतिशत बढ़ सके।
इधर, पिछले चुनाव में जहां हुए ज्यादा विवाद, वहां बढ़ेगा पुलिस बल(भोपाल समेत दस जिलों के केंद्रों हैं संवेदनशील)...
पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में टॉप रहे जिलों पर इस बार चुनाव आयोग की पैनी नजर है। वहां के अधिकारियों को आयोग ने अलर्ट करने के साथ अतिरिक्त पुलिस बल लगाने, स्थानीय पुलिस सक्रिय रहने की निर्देश दिए गए हैं।
पिछले चुनाव में आचार संहिता उल्लंघन और लड़ाई- झगड़े के 187 मामले दर्ज हुए थे। इसमें मुरैना जिला के सर्वाधिक 21 मामले रहे।
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के मुताबिक अशोकनगर में 18, ग्वालियर में 15, छिंदवाड़ा में 8, भिंड में 10, शिवपुरी 10, नरसिंहपुर में 7, भोपाल में 9, टीकमगढ़ और रतलाम में 6-6, सीहोर जिले में 4 विभिन्न लोगों और संस्थानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।
हालांकि इस वर्ष चुनाव से पहले ही आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन सहित अन्य मामलों में दो सौ से अधिक एफआईआर दर्ज किए गए हैं। इसमें से सबसे ज्यादा शिकायतें भोपाल और ग्वालियर संभाग में दर्ज की गई हैं।
Published on:
29 Oct 2018, 10:12 AM IST
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