
एमपी के सरकारी अस्पतालों में बदलेगा ढर्रा, इमरजेंसी में होगा स्पेशल इलाज
भोपाल. सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली नर्स इमरजेंसी के दौरान मरीजों के स्पेशल ट्रीटमेंट में दक्ष नहीं हैं। यही नहीं उनके पास तकनीकी इमरजेंसी में काम करने के गुर भी नहीं हैं। अस्पतालों में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के का वैसा ही उपचार किया जाता है जैसा सामान्य मरीजों का होता है। यह बात हम नहीं खुद स्वास्थ्य विभाग मानना है, यही कारण है कि अब स्वास्थ्य विभाग अपनी नर्सों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए एम्स भोपाल का सहयोग ले रहा है। स्वास्थ्य विभाग 17 जिला अस्पतालों की स्टाफ नर्सों को एम्स में स्पेशल ट्रेनिंग दिलवाएगा। 4 नवम्बर से एम्स में पहले बैच की ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी। इस ट्रेनिंग के लिए नर्सों का चयन हो चुका है।
कैंसर, ट्रामा, ओटी, आईसीयू मैनेजमेंट का मिलेगा प्रशिक्षण
प्रत्येक जिला अस्पताल में ट्रेंड स्टाफ नर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य संचालनालय ने स्टाफ नर्सों को 7-ओटी, 7- ट्रामा एंड इमरजेंसी, 8- आइसीयू, 8-हीमोडायलिसिस के साथ छह नर्सों को कैंसर केयर में तीन महीने की टे्रनिंग दिलाई जाएगी।
सोच बदलने की तैयारी
अधिकारियों का मानना यह भी है कि सरकारी अस्पतालों में स्टाफ के पास तकनीकी ज्ञान तो है, लेकिन एम्स और अन्य बड़े संस्थानों की तरह काम करने का जज्बा नहीं है। ऐसे में इस ट्रेनिंग का मकसद सरकारी महकमे की नर्सों की सोच बदलने और उनमें काम का जज्बा है। पहले बैच में बुरहानपुर, बडवानी, दतिया, दमोह, गुना, हरदा, झाबुआ, खरगोन, पन्ना, रायसेन, राजगढ़, रीवा, सागर, सीहोर, सीधी, सिंगरौली और टीकमगढ़ के जिला अस्पतालों में पदस्थ स्टाफ नर्स को 4 नवंबर से एक फ रवरी तक ट्रेनिंग मिलेगी।
Published on:
18 Oct 2019 01:07 am
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