
भोपाल। मध्यप्रदेश के दमोह जिले में 40 साल से रह रही 93 साल की महिला को आखिर मिल ही गए। नागपुर से 40 साल पहले अपने बच्चों से बिछड़कर यह मां भटकते हुए दमोह आ गई थी। यहां जब मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया तो घायल अवस्था में एक मुस्लिम परिवार ने उन्हें बचाया और सहारा भी दिया। इतने सालों से साथ रहते हुए पूरे मुस्लिम बहुल गांव की मौसी बन गई। पिछले सप्ताह ही इस बुजुर्ग मां ने 40 साल बाद अपने घर विदर्भ का सफर तय किया। उन्हें लेने नागपुर से बेटे आए थे। कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन में गूगल के जरिए उनके परिजनों ने खोज निकाला।
दमोह जिले के मुस्लिम बहुल गांव कोटा तला के लिए पंचू बाई मौसी है। लॉकडाउन में गूगल ने उन्हें ढूंढ निकाला और परिजनों से मिलवा दिया। जब पंचू बाई को गांव से विदा किया जा रहा था तो हर कोई फूट-फूटकर रो रहा था।
अपने परिजनों से बिछड़कर पंचू बाई जब दमोह पहुंच गई थी तब मधुमक्खियों ने उन पर हमला कर दिया था। तभी गांव के नूर खान उन्हें अपने गांव ले आए थे। गांव वालों ने भी सम्मान से उन्हें रखा और वो पूरे गांव की मौसी कहलाने लगीं। बाद में नूर खान का इंतकाल हो गया था।
सोशल मीडिया पर चलाया अभियान
पिता के इंतकाल के बाद उनके पुत्र व पौत्रों ने कोटातला की मौसी के महाराष्ट्र स्थित नागपुर में बिछड़े परिजनों की तलाशने की शुरुआत सोशल मीडिया से शुरू की। गूगल से लेकर वाट्सअप पर फोटो और वीडियो वायरल किए गए। नागपुर के पृथ्वी कुमार शिंदे ने उन्हें अपने दादी पंचू बाई के रूप में पहचान लिया, जो 40 साल पहले परिवार से बिछड़ गई थीं। नागपुर के शिंदे परिवार में खुशियां छा गई थी। वहीं कोटातला गांव में अपनी मौसी से बिछुड़ने का गम भी दिखने लगा था।
नागपुर से आया परिवार
पिछले गुरुवार को नागपुर से उनका पोता पृथ्वी शिंदे, अपनी पत्नी व एक दोस्त के साथ लेने पहुंचा था। पृथ्वी शिंदे ने बताया कि उनका परिवार उम्मीद खो चुका था कि उनकी दादी अब जिंदा नहीं है। जब उसे पता चला कि एक मुस्लिम परिवार पिछले 40 साल से अपने घर में मौसी के रूप में उसकी दादी को सहारा दिया। हालांकि अब उनकी दादी को आश्रय देने वाले नूर खां अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन, यह घटना कौमी एकता की जीती जागती मिसाल है।
नूर खान के पुत्र इसरार खान बताते हैं कि उनके पिता ने भी काफी प्रयास किए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। उनके द्वारा भी मौसी का परिवार खोजने का प्रयास किया जाता रहा है। इसके बाद मौसी का विडियो बनाया गया, जिसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
गांव में हर कोई रोया
40 साल से कोटातला की मौसी पंचू बाई जब अपने पोते की गाड़ी में बैठने लगी तो मुस्लिम बाहुल्य कोटातला बस्ती के लोग फूट-फूटकर रोने लगे। माहौल ऐसा लगा कि मानो गांव अपनी बेटी की विदाई कर रहा हो। हर शख्स छोडऩे आया। किसी ने फूल बरसाए तो किसी ने अपने अश्रुओं की धारा बहाई।
नूर खान का पूरा परिवार मिसाल
मौसी के विदा होने का दृश्य देखने वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. अजय लाल भी मौके पर पहुंचे। क्योंकि नूर खान के पुत्र समीर व इसरार उनके संस्थान में कार्यरत हैं। जब उन्हें मानवीयता की मिसाल की खबर मिली तो इन सुखद पलों को निहारने वह स्वयं पहुंचे और कह उठे कि नूर खान का पूरा परिवार एक मिसाल है। मुस्लिम समाज के वरिष्ठ अनवारूल हक का कहना है कि नूर खान के पुत्र इसरार और उनके भाईयों ने बता दिया कि इंसानियत से बढ़कर कोई महजब नहीं है।
Updated on:
25 Jun 2020 05:09 pm
Published on:
25 Jun 2020 12:20 pm
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