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प्यार के क्लाइमेक्स में कैंसर की इंट्री और 38 लाख की चपत

ये कहानी है अंकिता की(बदला हुआ नाम)। उम्र होगी यही कोई 23 साल। अनामिका राजधानी के एक बड़े सरकारी अधिकारी की बेटी है। वह हाउसिंग बोर्ड कालोनी ऐशबाग में रहती है। अंकिता के साथ एक-दो लाख नहीं बल्कि 37.88 लाख की लूट हुई है।

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भोपाल. ये कहानी है अंकिता की(बदला हुआ नाम)। उम्र होगी यही कोई २१ साल। अनामिका राजधानी के एक बड़े सरकारी अधिकारी की बेटी है। वह हाउसिंग बोर्ड कालोनी ऐशबाग में रहती है। अंकिता के साथ एक-दो लाख नहीं बल्कि ३७.८८ लाख की लूट हुई है। लूट की पहेली बेहद अजीब है। अजीब इसलिए क्योंकि लूटने वाले ने इमोशनल ब्लैकमेलिंग की। बिल्कुल फिल्मों जैसी। खुद को कैंसर रोगी बताकर चार साल तक वह भावनात्मक रूप से रूपए ऐंठता रहा। अंकिता ने जब युवक से उधार वापस मांगना शुरू किया तब अहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुकी है।
ओपेन टॉक एप से हुई दोस्ती...
इस पहेली को सुलझाने के लिए इस पूरी कहानी को सुनना और समझना जरूरी है। साइबर क्राइम एसआइ विवेक आर्या बताते हैं कि जनवरी २०१८ में अंकिता ने ग्रेजुएशन के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इंग्लिश स्पोकन इंप्रूव करने के लिए ओपन टॉक एप डाउनलोड किया। यह एप अनजान लोगों के साथ इंग्लिश स्पोकन का मौका देता है। इस एप के जरिए अंकिता की पहचान साईं तेजा शर्मा नामक युवक से हुई। जो खुद को साउथ इंडियन बताता था। उसे हिंदी नहीं आती थी। ्रएप पर ही दोनों ने मोबाइल नंबर को एक्सचेंज किया। दोनों की कॉल पर बातचीत होने लगी। दोस्ती परवान चढ़ी।
एक-दो हजार से उधार की शुरुआत
चैटिंग और बातचीत हमेशा इंग्लिश में होती थी। इससे युवक की बुद्धिमत्ता और समझ से अंकिता प्रभावित हो गयी। उस पर काफी भरोसा करने लगी। इस बीच सांई तेजा ने अंकिता से एक-दो हजार रु उधार लेना शुरु किया। इसे वह वापस कर देता था।
1 जनवरी 2019 से 19 अगस्त 2023 तक ३७.८८ लाख
जब अंकिता पूरी तरह से उस पर विश्वास करने लगी तब जनवरी २०१९ में उसने कैंसर होने का झांसा देकर पहली बार डेढ्् लाख मांगे। खुद की जिंदगी के चंद दिन बचे होने का झांसा देकर वह हर बार भावनात्मक रूप से रूपए मांगता और उसमें से कुछ वापस कर देता। १९ अगस्त २०२३ तक एक-दो लाख की यह रकम बढ़ते-बढ़ते ३७.८८ लाख हो गयी। छह माह पहले साईं तेजा ने अंकिता को टरकाना शुरु कर दिया। अंतत: उसने अपना फोन बंद कर लिया। यह सारी रकम दर्जनों बार में ऑन लाइन ट्रांसफर के जरिए हड़पी गई।
अवसाद में अंकिता
आरोपित ने जब रुपए देने से इंकार कर दिया तो युवती ने अंतत: पूरा घटनाक्रम अपने पिता को बताया। उसके बाद उसकी तबियत बिगड़ गई, वह मानसिक अवसाद में चली गई। पिता के समझाने के बाद बड़ी मुश्किल से एफआइआर को राजी हुई।
पहेली अजीब क्यों
भावानात्मक रुप से फंसाया, असली नाम तक नहीं पता
आरोपित युवती से कभी मिला नहीं। ऐसे में उसके घर का पता, फोटो तक उपलब्ध नहीं है। पुलिस का कहना है कि आरोपित का नाम भी फर्जी हो सकता है।
पिता को क्यों नहीं पता चला उड़ गए रूपए
क्योंकि-खाते में जोड़ रखा था बेटी का नंबर
पिता ने बेटी का नंबर बैंक में दर्ज कराया था। बेटी का यूपीआई पिता के खाते से जुड़ा था इसलिए वह मुख्य खाते से भुगतान करती रही। रुपए निकलने के मैसेज भी बेटी के नंबर पर आते थे, इससे पिता को जानकारी तक नहीं हुई।
अब क्या
साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस को आरोपी का वास्तविक नाम क्या है, इसको लेकर संदेह है। मोबाइल नंबर के आधार पर उसकी तलाश में जुट गई है। आरोपित तमिल भाषा में भी बात करता था, ऐसे में अनुमान है कि शायद तमिलनाडु का हो । आरोपित के खातों की जानकारी बैंक से मांगी गई हैं जिसके आधार पुलिस आरोपित तक पहुंचने की कोशिश में है। बेहद उलझी हुई इस पहेली को क्या पुलिस सुलझा पाएगी। सिर्फ एक नंबर के सुराग से क्या शातिर लुटेरे तक पहुंच पाएगी। यह देखना अहम होगा।