आज भी पारम्परिक तरीकों से औजार बनाने का काम करता है अगरिया समुदाय

मानव संग्रहालय में मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी

By: hitesh sharma

Updated: 11 Sep 2021, 12:47 AM IST

भोपाल। मानव संग्रहालय की ऑनलाइन प्रदर्शनी शृंखला में मिथक वीथि मुक्ताकाश प्रदर्शनी से अगरिया जनजाति की उत्पत्ति के मिथक से जुड़ी जानकारी को फोटो और वीडियो के साथ प्रदर्शित किया गया। संग्रहालय के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि प्रागैतिहासिक काल के दौरान दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पत्थर के औजार और आग की खोज की गई थी। समय बीतने के साथ पहिया और धातु के औजारों के आविष्कार ने मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए और लोहे की खोज मील का पत्थर साबित हुई।

काल पर्वत शृंखला से वे गहरे लाल रंग के पत्थर का चयन कर के लौह अयस्क प्राप्त करते हैं

अगरिया जनजाति उन समुदायों में से एक है जो पारंपरिक तरीके से लोहा पिघलाने का काम करते थे। यह जनजाति मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के मंडला, डिंडोरी, बालाघाट और सीधी जिले और छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, राजगढ़ तथा कवर्धा जिलों के आसपास के क्षेत्र में निवास करती है। अगरिया मध्यप्रदेश की एकमात्र ऐसी जनजाति है, जिसने प्राचीन काल से पत्थर-लोहे के खनन का काम किया है तथा ये लोग लोहे के औजारों का निर्माण भी करते थे। समुदाय से जुड़े कुछ लोग अभी भी लोहे को गलाने का अपना पारम्परिक व्यवसाय करते हैं। मैकाल पर्वत शृंखला से वे गहरे लाल रंग के पत्थर का चयन कर के लौह अयस्क प्राप्त करते हैं। अयस्क तथा कोयले को बराबर मात्रा में भट्टी में मिलाकर, पैर से चलने वाली धौंकनियो से जिसमे हवा पोले बांस से है, उसे गरम करते है। यह सिलसिला घंटों तक लगातार चलता रहता है। जैसे ही स्लैग (धातु-मैल) का प्रवाह बंद हो जाता है, यह माना जाता है कि प्रक्रिया समाप्त हो गई है।

कई तरह की कहानियां हैं प्रचलित
संग्रहालय एसोसिएट पी अनुराधा ने बताया कि पहले यह माना जाता था कि अगरिया के लोगों के पास औजार नहीं होते थे। वे लोहे का सारा काम अपने हाथों से ही करते थे और इस प्रक्रिया में उनके हाथ-पैर हर-रोज जलकर खत्म हो जाते थे। यह बहुत कष्टकारी था, लेकिन अगली सुबह वापस उग आते थे। एक दिन, अगरिया अपनी परेशानियों के बारे में बताने भगवान के पास पहुंचे। भगवान की कृपा से और अपनी बुद्धि एवं कौशल का उपयोग कर के रास्ते में बैठे कुत्ते के पैरों को देख सँड़सी बनाने, कढफ़ोड़वा की चोंच देख हथौड़ा बनाने की प्रेरणा मिली। उसी दिन से वे औजारों का प्रयोग करने लगे। अगरियाओं की उत्पत्ति, आग की उत्पत्ति, लकड़ी से कोयला बनाने की किंवदंतियां, लोहासुर के मिथक आदि से जुड़ी कई कहानियां हैं, लेकिन आज हम केवल उनकी उत्पत्ति से जुड़े मिथकों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। अगरिया अपने मूल की कहानी को कुछ इस तरीके से बताते है।

hitesh sharma Reporting
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