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MP New Transfer Policy में बदलाव, म्युचुअल और स्वैच्छिक तबादलों पर CM का बड़ा फैसला

MP New Transfer Policy: मध्य प्रदेश में तबादला नीति को लेकर मोहन यादव सरकार मंत्रिमंडल का अहम फैसला, क्या आपको भी है तबादले का इंतजार? यहां समझें प्रदेश सरकार के MP New Transfer Policy का गणित

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MP new Transfer policy

MP new Transfer policy (फोटो- Patrika.com)

MP New Transfer Policy: नई तबादला नीति दूसरी बार अटक गई है। लेकिन सीएम डॉ. मोहन यादव और उनके मंत्रीमंडल ने बड़ा और अहम निर्णय लिया है। अब अपनी मर्जी से तबादला कराने वालों को नीति से बाहर रखा जाएगा। यानी प्रशासकीय आधार पर बीते साल से 5 फीसदी ज्यादा के तबादले हो सकेंगे। असल में जब नीति आती है तो सरकार एक फॉर्मूले के तहत राज्य के कुल कार्यरत कर्मियों में से 10-15 फीसदी तबादले की अनुमति देती है। स्वैच्छिक तबादले इस सीमा (MP New Transfer Policy) से अलग रहेंगे। अगर आप भी ट्रांसफर का इंतजार कर रहे हैं, तो जल्द ही आपका यह इंतजार खत्म हो जाएगा। जरूर पढ़ें राहत भरी खबर

यह दिए सुझाव चर्चा में

मंत्री शाह ने कहा, स्वैच्छिक आधार पर किए जाने वाले तबादले नीति (MP New Transfer Policy) से बाहर किए जाएं। अन्य मंत्रियों ने सुझाव दिए कि दो कर्मियों की सहमति के आधार पर किए जाने वाले म्युचुअल तबादलों को भी तबादला नीति से बाहर रखा जाना चाहिए।

अब प्रशासकीय ट्रांसफर के लिए खुलेगा रास्ता

बता दें कि जब भी सरकार तबादला नीति लाती है, तो कुल कार्यरत कर्मचारियों के 10-15 फीसदी तबादलों को ही अनुमति दी जाती है। पूर्व की व्यवस्था के तहत स्वैच्छिक और आपसी तबादले भी इसी कोटे का हिस्सा होते थे। इससे प्रशासनिक आधार पर जरूरी फेरबदल के लिए गुंजाइश बहुत कम बचती थी। ऐसे में जहां वाकई कर्मचारियों की जरूरत होती थी, वहां ट्रांसफर ही नहीं हो पाते थे।

नई व्यवस्था को ऐसे समझें

अब नई व्यवस्था के तहत सरकार प्रशासनिक आधार पर पिछले साल की तुलना में 5 फीसदी अधिक तबादले (MP New Transfer Policy) कर सकेगी। इसका सीधा सा अर्थ ये है कि स्वैच्छिक आवेदन करने वाले कर्मचारी अब उस 15 प्रतिशत की सीमा को प्रभावित नहीं कर सकेंगे। इससे सरकार के पास प्रशासनिक कसावट के लिए अधिक विकल्प मौजूद रहेंगे।

क्या है सरकार की मंशा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस मामले पर सरकार की मंशा साफ है कि तबादलों (MP New Transfer Policy) में पारदर्शिता रहे और मर्जी यानी म्युचुअल और स्वैच्छा से किए जाने वाले तबादलों के कारण जरूरी तबादले न रुकें।

मंत्री शाह के सुझाव क्यों महत्वपूर्ण

मंत्री का तर्क था कि यदि दो कर्मचारी एक-दूसरे की जगह जाने को तैयार हैं, तो इससे सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ता और न ही प्रशासनिक व्यवस्था बिगड़ती है। इसलिए इसे प्रतिबंधों से दूर रखना ही बेहतर है।

क्या फायदा?

इससे उन क्षेत्रों में पदों को भरने में आसानी होगी, जहां कर्मचारियों की कमी है। वहीं प्रशासनिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार के पास अब ज्यादा स्पेस होगा। वहीं इससे मुख्य तबादला सूची में देरी नहीं होगी।

बता दें कि सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया है। वहीं मंत्रिमंडल ने मामले पर सुझाव भी दिए हैं। अब माना जा रहा है कि अगर ऐसा होता है, तो तबादला नीति स्पष्ट होने के बाद तबादलों के नाम पर की जाने वाली सिफारिशों में कमी आएगी, जिससे भ्रष्टाचार रुकेगा। वहीं घर के पास या पसंदीदा जिले में जाने वाले कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ती है, इसका लाभ सीधे सरकार को मिलेगा।

तबादला नीति पर सरकार के फैसले के अहम बिंदु

नया फॉर्मूला- 10-15 फीसदी की सीमा केवल प्रशासनिक तबादला लिस्च पर लागू होगी

म्युचुअल राहत- आपसी सहमति से किए जाने वाले ट्रांसफर अब नई ट्रांसफर पॉलिसी का हिस्सा नहीं होंगे

तबदलों की गुंजाइश बढ़ी- अब पिछले साल से 5 फीसदी ज्यादा प्रशासनिक तबादले संभव होंगे

हुआ सरलीकरण- कर्मचारियों को अपनी मर्जी से जिला बदलने के लिए अब लंबा इंतजार नहीं करना पडे़गा।