
loving couple
नाबालिग मामलों में लड़के पर अपहरण और पॉक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराएं लग जाती हैं। जबकि, नाबालिग लड़कियों को महिला बाल विकास केंद्रों में भेज दिया जाता है। यह तथ्य चाइल्ड लाइन से मिले हैं। फिलहाल, विशेष किशोर पुलिस इकाई आरंभ संस्था के सहयोग से काउसिंलिंग का काम करती है।
केस-1
मोबाइल पर घंटों अनजान शख्स से बातें
बैरागढ़ से भागा एक कपल उज्जैन गया। फिर लौट आया। घर आते ही लड़की वालों ने लड़के पर पॉक्सो एक्ट सहित कई धाराओं में मामला दर्ज करा दिया। लड़की की काउंसलिंग हुई। काउंसलिंग में लड़की ने बताया कि वह अक्सर घर में रहती थी। मां बेफिक्र थी कि बेटी घर पर है। घर पर घंटों मोबाइल पर रहती थी। इस दौरान एक अनजान कॉल पर प्रेम हुआ। और घर छोड़कर भागने की स्थिति बन गयी।
केस-2
पढ़ने की उम्र में घर बसाने के सपने
अशोका गार्डन का एक प्रेमी कपल भागकर मुंबई पहुंच गया। वहां होटल संचालक इन पर शक हुआ तो इसकी सूचना पुलिस को दी। दोनों पकड़े गए फिर भोपाल लाए गए। भोपाल में दोनों की काउंसलिंग की गई। दोनों अभी पढ़ाई कर रहे थे। दोनों का प्रेम परवान चढ़ा तो पढ़ाई छूट गयी। अब परिजनों ने भी साथ रखने से इनकार कर दिया। फिलहाल दोनों सुधार गृह में हैं।
रोजाना के 20-25 शिकायतें, केस दर्ज
थानों में रोजाना के 20 से 25 आवेदन घर से भागने के आते हैं। इनमें से आठ से दस केस में केस दर्ज होता है। ज्यादातर केसों में बरामदगी के बाद प्रकरण कायम होता है। नाबालिग में संबंध बनाने पर लड़के पर पॉक्सो एक्ट लगता है।
सोशल मीडिया ने बिगाड़ी स्थिति
अर्चना सहाय, डायरेक्टर, आरंभ संस्था का कहना है कि समाजशास्त्रियों के अनुसार सोशल मीडिया और एंड्राइड फोन ने स्थिति बिगाड़ी है। इसलिए 15 से 18 साल की उम्र के बच्चों पर अभिभावकों को ज्यादा ध्यान देना चाहिए। अस्सी फीसदी केसों में बाद में अभिभावकों और भागने वाले जोड़ों के हाथ पछतावा ही आता है। इसलिए सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए।
Published on:
20 Sept 2023 05:02 pm

बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
