
भोपाल। मध्यप्रदेश में निजी नहीं बल्कि अब सरकारी स्कूलों की पढ़ाई भी महंगी हो गई है। नई व्यवस्था के अनुसार आगामी शिक्षण सत्र से परीक्षा शुल्क में इजाफा कर दिया गया है। शिक्षण सत्र 2018-19 से विद्यार्थियों से लिया जाने वाला परीक्षा शुल्क 61 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है। अभी तक 10वीं और 12वीं कक्षा में ली जाने वाली परीक्षा शुल्क राशि 550 रुपए थी, जिसे बढ़ाकर 900 रुपए कर दिया गया है। इस फैसले का लगभग 20 लाख विद्यार्थियों पर सीधा असर पड़ेगा।
मध्यप्रदेश शासन शिक्षा विभाग के निर्णय मंडल में आयोजित कार्यपालिका समिति की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। परीक्षा शुल्क में 61 फीसदी की बढ़ोत्तरी के बाद अब विद्यार्थियों को 350 रुपए अधिक देने होंगे। परीक्षा शुल्क बढ़ाने के संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल का कहना है कि बोर्ड पर लगातार खर्चों का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा बोर्ड का यह भी कहना है कि विद्यार्थियों से ली जा रही परीक्षा शुल्क राशि अन्य राज्यों के बोर्ड की तुलना में काफी कम है, ऐसे में यह जरूरी है कि परीक्षा शुल्क बढ़ाया जाए।
बोर्ड को होगा 108 करोड़ रुपए का फायदा
परीक्षा शुल्क बढ़ाने के लिए बोर्ड भले ही अपने तर्क दे रहा हो, लेकिन यह बात भी स्पष्ट है कि परीक्षा शुल्क बढ़ाए जाने से करीब 20 लाख छात्रों पर सीधा फर्क पड़ेगा। वहीं परीक्षा शुल्क बढ़ाने से मंडल को हर साल तकरीबन 108 करोड़ रुपए की आय होगी। इसमें पहले से 42 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फायदा मिलेगा। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा हर साल तकरीबन 20 लाख विद्यार्थी परीक्षा देते हैं, इनमें 12 लाख सामान्य परीक्षार्थी शामिल होते हैं। बोर्ड का कहना है कि दूसरे राज्यों के बोर्ड और अन्य बोर्ड 2 से 3 हजार रुपए तक परीक्षा शुल्क लेते हैं, ऐसे में ये माना जा रहा है कि भविष्य में परीक्षा शुल्क में और इजाफा हो सकता है।
हर साल 3 से 4 लाख छात्र छोड़ देते हैं बोर्ड का साथ
वैसे तो मध्यप्रदेश सरकार शासकीय विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने और उनमें विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के दावे लगातार करती आ रही है, लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि इन सारी कोशिशों के बाद भी सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। शासन की ओर से सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को मुफ्त किताब, यूनिफार्म व भोजन दिया जाता है, लेकिन फिर भी सरकारी स्कूल बच्चों की पसंद बनने में लगातार पिछड़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 3 से 4 बच्चे सरकारी स्कूलों को छोड़कर निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं।
माना जा रहा है कि इसका सबसे बड़ा कारण निजी स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने की चाहत है, जिसके चलते अभिभावक सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने से कतरा रहे हैं। साथ ही सरकारी स्कूल में पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण नहीं मिल रहा है। प्रदेश के कई स्कूलों की स्थिति यह है कि कुछ स्कूलों के भवन नहीं हैं तो कुछ में पढ़ाने के लिए शिक्षक। इस स्थिति में परीक्षा शुल्क बढ़ाने का विद्यार्थियों पर क्या असर पड़ेगा, ये आगामी शिक्षण सत्र में देखने योग्य होगा।
Published on:
09 May 2018 01:12 pm
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