बोर्ड का ये फॉर्मूला कीमतों को और बढ़ा सकता है। वर्ष 2010 से चल रहे प्रोजेक्ट के दाम में हर साल 10 प्रतिशत की दर से वृद्धि की गई है, जो 6 साल में 60 प्रतिशत बनती है। इसके मुकाबले 6 साल पुरानी गाइडलाइन और मौजूदा दरों में 100 प्रतिशत का अंतर है। कलेक्टर गाइडलाइन को आधार बनाया गया तो दाम नीचे आने की बजाए आसमान पर पहुंच जाएंगे।