
नशीली दवा की 350 शीशियां बरामद, आरोपी गिरफ्तार
भोपाल/ गोविंदपुरा डिस्पेंसरी के पीछे बड़ी मात्रा में दवाईयां मिली हैं। भेल प्रबंधन जांच में जुटा हुआ है कि यह दवाएं किसने फेंकी हैं। जानकारी के मुताबिक इनमें दर्द, बुखार और सर्दी-खांसी जुकाम की दवाएं शामिल हैं। मामले में भेल प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने यह दवा नहीं खरीदी ही नहीं है। उधर खाद्य एवं औषधि प्रशासन के असफरों को अभी तक इस बारें में कोई जानकारी तक नहीं हैं। कस्तूरबा अस्पताल चिकित्सा सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य कमलेश नागपुरे ने बताया कि दवा पुरानी होने के बाद यहां पर किसने फेंकी हैं, इसकी जांच कराई जा रही है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि यह दवाएं किसने फेंकी।
यह है नियम
- दवा एक्सपायर होने के बाद इन्हें कंपनी को वापस भेजने का नियम है। विशेष परिस्थितियों में अगर दवाएं नष्ट ही की जानी हैं, तो जिले के ड्रग इंस्पेक्टर को दवाओं की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। इसके बाद टेबलेट को क्रश कर उन्हें गहरे गड्ढे में दबाना जरूरी है। अगर एक्सपायर दवाओं में इंजेक्शन व वैक्सीन भी हैं, तो उन्हें सिर्फ इंसीनरेटर में ही नष्ट कराया जा सकता है।
स्वशासी समिति की बैठक में रखा जाएगा नर्सों के वेतन का मुद्दा
हमीदिया अस्पताल की स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, सोशल वर्कर सहित अन्य कर्मचारियों को समयमान-वेतनमान की मांग पूरी होते दिख रही है। नर्सेस एसोसिएशन ने अध्यक्ष धनराज नागर के मुताबिक बुधवार को इस संबंध में जीएमसी डीन डॉ. टीएन दुबे से मीटिंग हुई थी।
उन्होंने कहा कि गुरुवार को होने वाली स्वशासी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर मुहर लग सकती है। इसके अलावा उन्होंने डीन से रिक्त पदों पर नसेज़्स की भर्ती की मांग की गई है। डीन ने बताया कि रिक्त पदों की भर्ती के लिए व्यापमं को प्रस्ताव भेजा है। मेडिकल कॉलेज में सीधी भर्ती कर वहां पर नर्सेस की कमी को दूर किया गया है।
Updated on:
05 Dec 2019 11:50 am
Published on:
05 Dec 2019 09:58 am
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