
अंधियारी जिंदगी में खुशियों के रंग भरने की सार्थक पहल
भोपाल/संत हिरदाराम नगर. अंधेरे को मिटाने में रोशनी की एक किरण ही काफी होती है। नेत्रदान के जरिये दृष्टिबाधितों की अंधियारी जिंदगी को रोशन करने की सार्थक पहल में सहभागी बनने वालों की संख्या दिनोदिन बढ़ रही है। सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता इस मुहिम को आगे बढ़ाने में शिद्दत से जुटे हैं।
रंग बिरंगी और खुशियों से भरी इस दुनिया को देखने से महरूम रहने वाले दृष्टिबाधितों को नेत्रदान के जरिये जिंदगी का सबसे नायाब तोहफा देने वालों के प्रयास रंग लाने लगे हैं। तमाम कुशंकाओं को दरकिनार कर नेत्रदान के लिए सहमति देने वालों की बढ़ती संख्या इसका प्रमाण है।
राजधानी में भी नेत्रदाताओं की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। इन्हीं के प्रयासों से कई अंधियारी जिंदगी में खुशियों के रंग भरने में सफलता हासिल हुई है। संतनगर स्थित सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय वर्ष १९८७ से नेत्र रोगियों को खुशियों से भरी रोशनी देने में जुटा है।
हजारों नेत्र रोगियों को न केवल रोग से निजात मिली है, बल्कि अस्पताल द्वारा चलाए जाने वाले जागरुकता अभियान से प्रेरित होकर सैकड़ों ऐसे दानदाताओं का सहयोग मिला है जो नेत्रदान के जरिये किसी अंधियारी जिंदगी को रोशन करने के संकल्पित हैं।
शिविर लगाकर करते हैं सेवा
संतनगर समेत आसपास के शहरों और वो भी ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा सदन अस्पताल की ओर से शिविर आयोजित किए जाते हैं। यहां नेत्र रोगियों की पहचान और उचित परामर्श दिया जाता है। जिन मरीजों को ऑपरेशन या अन्य नियमित उपचार की आवश्यकता होती है उन्हें संतनगर स्थित अस्पताल में सर्वसुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। अस्पताल में रोजाना तीन सौ से अधिक मरीजों के आंखों की जांच एवं उपचार किया जाता है। खास बात है कि त्योहारों पर भी अस्पताल के दरवाजे खुले रहते हैं।
हर साल सौ से ज्यादा जिंदगी होती हैं रोशन
सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय में नेत्र दान के लिए साल में ५०० से अधिक संकल्प फार्म भरे जाते हैं, जिसमें से एक साल में औसतन सौ दानदाता नेत्रदान करते हैं। इनसे दृष्टिबाधितों की जिंदगी रोशन होती है। सेवा सदन में अभी तक १५५२ दृष्टिबाधितों को नि:शुल्क नेत्र प्रत्योपित किए गए हैं।
लाखों मरीजों के नेत्रों की जांच
सेवा सदन द्वारा आयोजित नेत्र शिविरों में मरीजों का नि:शुल्क पंजीयन कर ऑपरेशन किया जाता है। इसके अलावा मरीजों को रहने ओर भोजन आदि की व्यवस्था भी नि:शुल्क की जाती है। शिविर के जरिये लाखों मरीजों के नेत्रों की जांच की जा चुकी है। इसके अलावा यूरोलॉजी जेैसी बीमारियों के इलाज के लिए भी शिविर आयोजित किए जाते हैं। अस्पताल में देश के ख्यात चिकित्सकों के अलावा विदेश के चिकित्सकों का भी सहयोग मिलता है।
नेत्रदान-देहदान का लिया संकल्प
करोंद क्षेत्र के द्वारिकाधाम परिसर निवासी संजय कालरा और उनकी पत्नी बिंदु ने नेत्रदान के साथ ही देहदान करने का संकल्प लिया है। संजय पेशे से व्यवसायी है। पत्रिका से बातचीत में कहा कि दो साल पहले मैं पत्नी के साथ घर पर बैठा था। दोपहर को एक न्यूज चैनल पर ऐसे ही दानदाताओं के बारे में बताया जा रहा था। मुझे लगा कि अगर मरने के बाद शरीर का अंग जैसे आंख, किडनी आदि किसी के काम आ जाएं, तो अच्छी बात होगी। तत्काल हम दोनों ने निर्णय लिया। मैंने अपने एक- दो मित्रों की राय ली, तो सभी ने मेरे निर्णय की तारीफ की। फिर हम दोनों ने सेवासदन बैरागढ़ जाकर संकल्प फार्म भर दिया।
Published on:
08 Jun 2018 01:25 pm
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