
Eye Flu : सावधान ! कई प्रकार के बैक्टीरिया एक्टिव, तेज़ी से फ़ैल रही ये खतरनाक बीमारी, बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा
भोपाल. शहर में आइफ्लू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक सप्ताह पहले तक शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में 100 के करीब मरीज पहुंच रहे थे। वहीं अब यह आंकड़ा 300 के पार है। जेपी अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा मिश्रा के अनुसार 1997 में ऐसी स्थिति बनी थी, जब आइफ्लू के इलाज के लिए जरूरी ड्रॉप की कमी हो गई थी। हालांकि भोपाल में अभी ऐसी स्थिति नहीं है। यदि ऐसे ही मरीजों की संख्या बढ़ती रही तो समस्याएं बढ़ सकती हैं। बता दें, दिल्ली के कई क्षेत्रों में लोग एंटीबायोटिक आइ ड्रॉप के लिए परेशान हो रहे हैं।
क्या है आइफ्लू
'आइफ्लू' जिसे कंजंक्टिवाइटिस भी कहा जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति को आंखों में जलन, दर्द व लालपन जैसी समस्या झेलनी पड़ती है।
आंखों की रोशनी पर असर
ओपीडी में आने वाले कुछ मरीज दो हफ्ते तक धुंधला दिखने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। हमीदिया अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एसएस कुबरे के अनुसार आइफ्लू का असर पुतली पर पड़ता है। जिससे कुछ समय के लिए आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ता है। इन मरीजों में चार से पांच दिन बाद कॉर्निया में छोटे-छोटे सफेद निशान पड़ते हैं। जो ठीक होने में लंबा समय लेते हैं। जिससे व्यक्ति को धुंधला दिखने की समस्या रहती है।
पहले अकेले फिर पूरे परिवार के साथ पहुंच रहे लोग
रोजाना अस्पताल की ओपीडी में 80 से 90 मरीज आइफ्लू के आ रहे हैं। पहले वे अकेले आते हैं, बाद में पूरे परिवार के साथ आते हैं। इसमें एलर्जिक कंजक्टिवाइटिस और बैक्टीरियल कंजक्टिवाइटिस दोनों के मरीज शामिल हैं। संक्रमित व्यक्ति काला चश्मा या फिर जीरो पावर का चश्मा पहनकर रखें।इसके अलावा आंखों को हाथ से ना छुएं, पानी से आंखों को बार-बार धोते रहें और ऐसी चीजों से दूरी रखें जिन्हें अन्य लोग भी इस्तेमाल करते हैं।
-डॉ. निशा मिश्रा, नेत्र विशेषज्ञ, जेपी अस्पताल
Updated on:
24 Jul 2023 09:38 pm
Published on:
24 Jul 2023 09:37 pm
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