
court Decision in tampering case
भोपाल/जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने कांगे्रस विधायक हेमंत कटारे मामले में सरकार को जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया।
जस्टिस सीवी सिरपुरकर की सिंगल बेंच को कटारे की ओर से बताया गया कि यह मामला पूरी तरह झूठा व भाजपा की साजिश के तहत दर्ज कराया गया। इस मामले में पुलिस को छात्रा के शपथ पत्र की जांच करवाकर रिपोर्ट पेश करनी है।
भिंड की अटेर विधानसभा से विधायक हेमंत कटारे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उन्हें पत्रकारिता की एक छात्रा का दैहिक शोषण करने के मामले में जबरन फंसाया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उनके खिलाफ यह साजिश रची है। जिस छात्रा ने आरोप लगाए थे, सुनवाई के दौरान ही उसने कोर्ट में शपथ पत्र दिया कि यह पूरा मामला राजनीतिक है।
हेमंत कटारे पर उसने जो भी आरोप लगाए थे,वे गलत हैं। कोर्ट न पुलिस को जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था कि जो शपथ पत्र छात्रा ने दिया, वह सही है या गलत।
लेकिन 3 महीनों के बाद भी पुलिस जांच रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई। कोर्ट ने सरकार को 2 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंकुश जैन ने पैरवी की।
राघवजी की याचिका पर सुनवाई टली
यौनशोषण के आरोपी प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राघवजी की याचिकाओं पर मप्र हाईकोर्ट में सोमवार को नियत सुनवाई टल गई। याचिकाकर्ता की ओर से ही मामले में समय मांग लिया गया।
जस्टिस सीवी सिरपुरकर की सिंगल बेंच ने दो सप्ताह की मोहलत दे दी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर तय की। पूर्व वित्तमंत्री राघवजी ने दो याचिकाओं के जरिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर व लंबित मामले को निरस्त करने की मांग की है।
राघवजी के खिलाफ उनके घरेलू नौकर राजकुमार दांगी ने पांच जुलाई 2013 को भोपाल के हबीबगंज थाने में यौन शोषण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।
अधिवक्ता महेंद्र पटेरिया ने बताया कि याचिकाकर्ता नौ जुलाई 2013 को गिरफ्तार हुए थे। हाईकोर्ट ने 14 अगस्त 2013 को उन्हें जमानत दे दी थी। इस मामले में एक सीडी भी सामने आई थी।
भोपाल की एससीएसटी एट्रोसिटी विशेष अदालत में भादंवि की धारा 377 व एससीएसटी एट्रेसिटी एक्ट के तहत मामले की सुनवाई लगभग पूरी हो गई है।
इधर, इस बार स्टार प्रचारक भी नहीं रहेंगे आडवाणी-जोशी...
पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी को मार्गदर्शक मंडल में बैठाने के बाद भाजपा उन्हें मध्यप्रदेश में स्टार प्रचारकों की सूची से भी बाहर करने जा रही है।
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और शत्रुघ्न सिन्हा 2013 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में स्टार प्रचारक थे, लेकिन इस बार पार्टी इन तीनों से किनारा करने जा रही है।
छत्तीसगढ़ के स्टार प्रचारकों की सूची में भी इन तीनों नेताओं को शामिल नहीं किया गया है। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और राज्यसभा सदस्य हेमा मालिनी मध्यप्रदेश में स्टार प्रचारकों में स्थान पा सकते हैं।
उत्तरप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ मंत्रियों को भी भाजपा मध्यप्रदेश में स्टार प्रचारक बना सकती है। मीटू से विवादों में घिरे पूर्व विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर को भी स्टार प्रचारक न बनाने पर सहमति बन गई है। अकबर मध्यप्रदेश से ही राज्यसभा सदस्य हैं और पहले उन्हें मुस्लिम बाहुल सीटों पर प्रचार का जिम्मा सौंपने की तैयारी थी।
Updated on:
30 Oct 2018 10:01 am
Published on:
30 Oct 2018 09:56 am
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