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किसान मां के इकलौते बेटे को इसरो साइंटिस्ट एग्जाम में एआईआर-1 रैंक

सूरज प्रसाद मिश्रा को इसरो से ट्रेनिंग के दौरान सालाना 12 लाख रुपए का पैकेज ऑफर  

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suraj prasad mishra

किसान मां के इकलौते बेटे को इसरो साइंटिस्ट एग्जाम में एआईआर-1 रैंक

भोपाल। टीआईटी कॉलेज में कम्प्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने वाले सूरज प्रसाद मिश्रा ने इसरो साइंटिस्ट एग्जाम में ऑल इंडिया फस्र्ट रैंक प्राप्त की है। इसके लिए उन्हें इसरो की ओर से ट्रेनिंग के दौरान सालाना 12 लाख रुपए का पैकेज ऑफर किया गया है। अपनी इस सफलता पर सूरज कहते हैं कि यह सफलता मां के आशीर्वाद और कोचिंग और कॉलेज के सपोर्ट से मिली है। वे बताते हैं कि जब वे 12 साल के थे तब पिता का देहांत हो गया था.

इसके बाद मां ऊषा मिश्रा ने घर में किसानी की बागडोर सम्भाली और बहुत मुश्किलों के बीच मुझे पढ़ाया। उन्होंने स्कूल के बाद आईआईटी के लिए मुझे कोटा में कोचिंग कराई थी। पर तब मैं क्लियर नहीं कर पाया था, इसी कारण भोपाल से इंजीनियरिंग करते हुए एमटेक आईआईटी से करने का ठान लिया था। इसी साल गेट में 130वीं रैंक मिली तो अब आईआईटी दिल्ली में एडमिशन भी हो गया।

व्यस्तता में एक टाइम ही खाना खाया
भोपाल में सेकंड ईयर के दौरान ही कोचिंग ज्वाइन कर ली थी और गेट व इसरो एग्जाम के लिए तैयारी करने लगा था। उस दौरान कोचिंग, कॉलेज और स्टडी का टाइम इतना अस्त व्यस्त था कि अक्सर दिन में एक टाइम ही खाना खा पाता था। दोस्तों के मोटिवेशन से लगातार तैयारी कर पाना संभव हुआ।

तकनीक में आत्मनिर्भरता दिलानी है
भविष्य को लेकर सूरज कहते हैं कि देश को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर काम करना है। अभी देश को सिक्योरिटी सिस्टम की टेक्नोलॉजी अमेरिका से खरीदनी पड़ती है। इस क्षेत्र में मैं आगे रिसर्च करना चाहूंगा। मैं चाहता हूं कि गूगल जैसी कम्पनियां अपने देश से भी निकले।

सफलता का 4 पॉइंट फॉर्मूला

- बड़ा सपना देखना जरूरी है (ड््रीम बिग)
- लगातार अपना नॉलेज बढ़ाते रहो

- अपने काम के प्रति इमानदार रहो
- जो अच्छा लगता है उस काम को करो