
Farmers becoming defaulters after taking loan
बैतूल. खेती के लिए कर्ज लेने वाले किसान समय पर कर्ज की अदायगी नहीं कर पाने के कारण डिफाल्टर हो रहे हैं। डिफाल्टर किसानों की संख्या सालाना तेजी से बढ़ रही है। इससे बैंक को भी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में करीब 44 हजार से अधिक किसान डिफाल्टर की श्रेणी में होना बताए जाते हैं। इनमें से लंबे समय से ऋण की अदायगी नहीं करने वाले नौ हजार किसानों से वसूली के लिए जिला केंद्रीय सहकारी बैंक ने म.प्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 84 के तहत नोटिस जारी किए हैं। ढाई हजार किसानों के प्रकरण तहसील न्यायालय में कुर्की की कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किए गए हैं। वहीं बैंक की कार्रवाई से परेशान किसानों का कहना है कि खेती अब लाभ का धंधा नहीं रही। खेती के लिए कर्ज लेकर कर्जदार बनते जा रहे हैं।
836 करोड़ की है सालाना डिमांड
जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के मुताबिक खरीफ एवं रबी सीजन मिलाकर कुल डिमांड 836 करोड़ रुपए की हैं। जिसमें से अभी तक 25 हजार किसानों से महज 93 करोड़ रुपए की वसूलना जा सका है। वहीं खरीफ सीजन की बात करे तो केंद्रीय सहकारी बैंक से खरीफ में 72 हजार किसानों को 312 करोड़ रुपए का ऋण वितरण किया गया था। खरीफ सीजन की ड्यू डेट 28 मार्च तक हैं लेकिन वसूली को लेकर स्थिति अभी नगण्य है।
ड्यू डेट के बाद देना होगा ब्याज
खरीफ सीजन के लिए ड्यू डेट 28 फरवरी निर्धारित की गई है। यदि किसान 28 फरवरी तक ऋण की बकाया राशि जमा कर देते हैं तो उन्हें ब्याज नहीं देना होगा। यदि 28 मार्च के बाद राशि जमा की जाती हैं तो 7 से 14 प्रतिशत तक ब्याज देना पड़ेगा। केंद्रीय सहकारी बैंक के मुताबिक खरीफ में कुल 312 करोड़ का ऋण 72 हजार किसानों को बांटा गया था। जिनसे वसूली के लिए अभियान चलाया जा रहा है। बताया गया कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंक ने पिछले साल 754 करोड़ ऋण वसूली के लक्ष्य के विरूद्ध कुल 429 करोड़ रुपए वसूले थे। जो की कुल डिमांड का महज 75 फीसदी था।
91 समितियों में वसूली के लिए अभियान
किसानों से ऋण की वूसली के लिए केंद्रीय सहकारी बैंक की 91 समितियों के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है। समितियों के माध्यम से वसूली के लिए गांव-गांव में शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक वसूली के लक्ष्य का पूरा किया जा सके। वसूली के लिए वाहन भी सतत गांवों में भ्रमण कर रहे हैं। बैंक ने कालातीत ऋण वसूली के लिए क्रिस योजना भी संचालित की जा रही है। जिसके तहत ढाई हजार के लगभग किसानों के वसूली के प्रकरण तहसील न्यायालयों के भेजे गए हैं।
धारा 84 में नौ हजार किसानों को नोटिस जारी
जिला केंद्रीय सहकारी बैंक ने म.प्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 84 के तहत कालातीत ऋणी किसानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। बताया गया कि पांच साल से जिन किसानों ने राशि जमा नहीं कराई हैं उन्हें इस धारा के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। इनकी संख्या जिले में करीब 9 हजार बताई जाती है। नोटिस में 30 दिन की समयावधि में किसानों को राशि जमा किए जाने के लिए कहा गया है। यदि राशि जमा नहंीं की जाती हैं तो इनके प्रकरण सिविल में दायर किए जाएंगे।
इनका कहना
- बकायादार किसानों से संपर्क कर ऋण वसूली की जा रही है। सहकारी संस्था के माध्यम से गांवों में ऋण वसूली के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। कालातीत ऋण वसूली के लिए सिविल में दो हजार प्रकरण भेजे गए हैं। साथ ही धारा 84 में नौ हजार किसानों को नोटिस जारी किए हैं।
-आलोक यादव, सीईओ जिला केंद्रीय सहकारी मर्यादित बैंक बैतूल।
- किसानों की जमीन समतल नहीं है। समय पर खाद, बीज एवं सिंचाई के लिए पानी एवं बिजली भी नहीं मिलती है। जिससे उपज की पैदावार प्रभावित होती है।फसल आने पर बाजार में भाव कम हो जाते हैं।सरकार को किसानों का पुराना कर्ज माफ करना चाहिए।कई दफा किसानों को बाजार से महंगी खाद बीज भी लेना पड़ता है। वही बिजली विभाग भी अस्थायी कनेक्शन के नाम पर मनमाना बिजली बिल जमा कराती है।खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए किसानों के बीच जाकर उन्हें खेती करने में आने वाली दिक्कतों को दूर करना होगा तभी ग्रामीण क्षेत्रों के किसान सोसायटी का कर्जा समय पर जमा कर सकेंगे।
-राकेश साहू, पूर्व उपाध्यक्ष प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति भौंरा।
केस 01- शाहपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत कुंडी के ग्राम दौड़ी के कृषक शेरसिंह प्रेमी के पास 10 एकड़ असिंचित जमीन हैं। उन्होंने वर्ष 2018 से सहकारी समिति से 70 हजार का ऋण उठाया था। जिसमें से 40 हजार रुपए जमा कर दिए, लेकिन आर्थिक स्थिति गड़बड़ाने के कारण वे शेष राशि जमा नहीं कर पाए और बैंक का कर्ज ब्याज सहित बढ़कर 1 लाख 9 हजार 196 रुपए हो गया। बैंक ने उन्हें डिफाल्टर घोषित कर कर्ज वसूली के लिए नोटिस जारी किए हैं।
केस 02- शाहपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भौंरा के ग्राम गुरगुंदा के कृषक सतीष बेले की 3 एकड़ असिंचित जमीन है। वर्ष 2018 में सतीष ने सहकारी समिति से 30 हजार के लगभग ऋण लिया था, लेकिन समय पर ऋण की अदायगी नहीं कर पाने के कारण ब्याज सहित ऋण की राशि बढ़कर 68 हजार 930 रुपए हो गई है। बैंक ने डिफाल्टर घोषित कर वसूली के लिए नोटिस जारी किया हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण कृषक ने ब्याज माफ किए जाने की मांग की।
Published on:
22 Feb 2023 08:55 pm
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