भारत भवन में दूसरी प्रस्तुति के रूप में बनारस घराने ने पेश किया। बनारसी संगीत को शहनाई समूह वादन में पिता पंडित दया शंकर और पुत्र संजीव आनंद और अश्विनी शंकर की जुगलबंदी ने श्रोताओं को मुरीद बना लिया। इस मौके पर आनंद ने तबले और दुक्क प्ले किया। संजीव और अश्विनी ने पिता के साथ नाटक संगीत में बजने वाले धुनों को इस दौरान पेश किया। दुक्का सिर्फ शहनाई के साथ बजाया जाता है। इसे नगाड़े का छोटा रूप कहते है।