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पिता और बेटी ने साथ मिलकर छेड़ी शहनाई की तान

शहनाई भारत के सबसे लोकप्रिय वाद्य यंत्रों में से है। जब शहनाई की खोखली नली से धुन निकलती है तब संगीत अपने चरम पर होता है।

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Juhi Mishra

Dec 18, 2016

Clarinet Festival

Clarinet Festival

भोपाल। शहनाई भारत के सबसे लोकप्रिय वाद्य यंत्रों में से है। जब शहनाई की खोखली नली से धुन निकलती है तब संगीत अपने चरम पर होता है। भारत भवन में चल रहे शहनाई समारोह में ही कुछ एेसे ही धुनों से शाम सज रही है।

शनिवार को भोपाल के लिए इतिहास दिन रहा। यहां दर्शकों को भारत की पहली महिला शहनाई कलाकार को सुनने का मौका मिला। पुणे की नम्रता गायकवाड़ ने पिता प्रमोद गायकवाड़ के साथ श्रोताओं को शहनाई की बंदिशों से बांधे रखा।

पिता और पुत्री की इस जोड़ी ने स्टेज पर राग यमन, विलंबित एक ताल और राग कलावति में बंदिश को पेश किया। इसके बाद उन्होंने नाट्य संगीत को शहनाई की धुनों में पिरोया।

बनारसी संगीत से बांधा समां
भारत भवन में दूसरी प्रस्तुति के रूप में बनारस घराने ने पेश किया। बनारसी संगीत को शहनाई समूह वादन में पिता पंडित दया शंकर और पुत्र संजीव आनंद और अश्विनी शंकर की जुगलबंदी ने श्रोताओं को मुरीद बना लिया। इस मौके पर आनंद ने तबले और दुक्क प्ले किया। संजीव और अश्विनी ने पिता के साथ नाटक संगीत में बजने वाले धुनों को इस दौरान पेश किया। दुक्का सिर्फ शहनाई के साथ बजाया जाता है। इसे नगाड़े का छोटा रूप कहते है।


शहीद भवन में नाटक कग्गराज का मंचन आज
भोपाल द्य रविवार की शाम 7 बजे शहीद भवन बच्चों के लिए बड़ों द्वारा अभिनय (थिएटर इन एजुकेशन) पद्धति से तैयार किए गए नाटक कग्गराज का मंचन किया जाएगा। यह नाटक रंग समूह स्विच ऑन स्क्यूरी आर्ट ऑर्गनाइजेशन की प्रस्तुति है। इस नाटक के लेखक व निर्देशक अभिषेक गर्ग हैं। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री दीपक जोशी भी उपस्थित रहेंगे।

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