
खाद की किल्लत
भोपाल. प्रदेश में खाद की किल्लत बरकरार है। हाल ये है कि डिमांड की तुलना में खाद की उपलब्धता ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. कई केंद्रों में खाद खत्म हो चुकी है. मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने किसानों की सुविधा के लिए 200 से ज्यादा केन्द्र खोलने और जिन क्षेत्रों में ज्यादा भीड़ हो रही है वहां 150 अतिरिक्त केन्द्र खोलने की बात कही है लेकिन इससे किसानों की दिक्कतें खत्म नहीं हो रहीं हैं।
वर्तमान में प्रदेश की 4500 सहकारी समितियों के पास सिर्फ 1.49 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। 30 हजार टन खाद रविवार तक और आने की उम्मीद है जबकि प्रदेश में रबी फसलों की बोवनी के लिए 26.25 लाख टन खाद की जरूरत है। करीब 1 करोड़ किसान रबी फसल की बोवनी करते हैं। यही वजह है कि खाद लेने के लिए समितियों में किसानों की अल सुबह से लाइनें लग रही हैं। हालांकि मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने किसानों को नकद खाद खरीदी के लिए 240 डबल लाक केन्द्र खोले हैं। साथ ही जिन क्षेत्रों में ज्यादा भीड़ होती है वहां 150 के करीब अतिरिक्त केन्द्र खोले हैं।
मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो रबी फसल की बोवनी के लिए अब तक 5 लाख 2 हजार टन यूरियाए डीएपीए एनपीके और पोटाश सहित अन्य खाद किसानों को उपलब्ध कराई गई है। निजी व्यापारियों के जरिए भी किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही हैए लेकिन इनकी दरें समितियों से ज्यादा हैं।
अफसरों का तर्क
कृषि और सहकारिता विभाग के सूत्रों का कहना है कि इन दिनों सहकारी समितियों में खाद के लिए सबसे ज्यादा लाइन डिफाल्टर किसानों की लगती है। सरकार ने डिफाल्टर किसानों के लिए भी समिति से नकद में खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।
सरकार का दावा
राज्य सरकार का दावा है कि नवंबर के लिए केंद्र ने 7 लाख टन यूरिया, डीएपी 1.94 लाख टन, एनपीके की 0.72 लाख टन का आवंटन किया है। 5 नवम्बर की स्थिति में यूरिया 1.20 लाख टन, डीएपी 0.83 लाख टन, एनपीके 0.34 लाख टन का आवंटन प्रदेश को मिल गया है।
Published on:
06 Nov 2022 10:52 am
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