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हाईकोर्ट ने कहा 20 करोड़ दो नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहो

मानसरोवर कॉम्प्लेक्स में 4.5 मीटर के फ्रंट हिस्से पर अवैध निर्माण मामले में मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट ने नगर निगम और एमपीआरडीसी को दो विकल्प दिए हैं। 

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sachin gupta

Jul 19, 2017

bhopal

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भोपाल/जबलपुर.़ मानसरोवर कॉम्प्लेक्स में 4.5 मीटर के फ्रंट हिस्से पर अवैध निर्माण मामले में मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट ने नगर निगम और एमपीआरडीसी को दो विकल्प दिए हैं। कोर्ट ने कहा- कॉम्प्लेक्स के इस मिनिमम ओपन स्पेस (एमओएस) वाले हिस्से को तोड़कर साफ कर दें या फिर 20 करोड़ रुपए की राशि जमा कर दें। एक अगस्त को इसके लिए शपथ पत्र देने का कहा है।
पेशी पर मंगलवार को निगमायुक्त छवि भारद्वाज व एमपीआरडीसी के जीएम डीएस राना उपस्थित हुए। यहां निगमायुक्त ने ये माना कि इस कॉम्प्लेक्स में एमओएस का उल्लंघन हुआ है। नगर तथा ग्राम निवेश के नक्शे में इस बिल्डिंग के फ्रंट में 4.5 मीटर का ओपन स्पेस और इतना ही पार्किंग का खुला क्षेत्र देने का प्रावधान किया था। शेषञ्चपेज 12
20 करोड़ देना है...
लेकिन ये नहीं छोड़ा गया। इस हिस्से में दुकानें बनाकर बेच दी गईं, जिससे पार्किंग की दिक्कत बनी रहती है। उन्होंने इसके लिए हाईकोर्ट के समक्ष 3.5 करोड़ रुपए की कंपाउंडिंग राशि जमा कराने का प्रस्ताव भी रखा।
याचिकाकर्ता कंज्यूमर एंड ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन सतीश नायक के वकील अजय मिश्रा ने इस पर आपत्ति ली, जिसके बाद इसे तोडऩे या 20 करोड़ रुपए जमा करने का निर्णय दिया। इस 20 करोड़ रुपए से कॉम्प्लेक्स के लिए नई पार्किंग विकसित की जाएगी। इसके साथ ही नगर निगम की ओर से भवन अनुज्ञा देने वाले अफसरों और इस भवन को बनाने वाले राज बिल्डर के जयंत भंडारी और साथियों पर मामला दर्ज करा कार्रवाई की मांग की। एक अगस्त को इस मामले में कोर्ट निर्णय दे सकता है।
बीआरटीएस का 4 मीटर हिस्सा कॉम्प्लेक्स में नगर निगम ने कोर्ट में दावा किया था कि बीआरटीएस में 60 मीटर की जगह उपयोग की गई है। इस पूरी रोड की नपती का वीडियो व फोटो बनाकर कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। उससे पता चला कि अभी बीआरटीएस कॉरिडोर के साथ जो सर्विस रोड बन रही है उसके बाद कॉम्प्लेक्स की ओर चार मीटर का हिस्सा भी पार्किंग या आम आवाजाही के उपयोग में आना चाहिए, लेकिन उस जगह पर निर्माण कर बेच दिया गया।