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भोपाल। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से भोपाल के खानू गांव में रविवार को बैठक का आयोजन किया गया है। बैठक जारी है। आपको बता दें कि बोर्ड की ओर से सोमवार को महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया है। बोर्ड की ओर से इस तरह का यह पहला आयोजन है, जिसमें देशभर की मुस्लिम महिलाएं शामिल होंगी। तीन तलाक मामले और शरीयत के नियम-कायदों को लेकर बोर्ड ने ये महिला सम्मेलन आयोजित किया है।
सुबह 10 बजे होगा शुरू, महिलाओं को ही मिलेगी एंट्री
देश का पहला मुस्लिम महिला सम्मेलन सोमवार सुबह 10 बजे से शुरू किया जाएगा। इस सम्मेलन में केवल महिलाओं को ही प्रवेश की अनुमति होगी।
ये भी होंगे शामिल
बोर्ड की ओर से मुस्लिम महिलाओं के इस पहले सम्मेलन में बोर्ड चेयरमैन मोहम्मद राबे हसन नदवी, मोहम्मद वली रहमानी, डॉ. Asma जेहरा, शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, ताजुल मसाजिद दारुल उलूम के प्रमुख सिराज मियां शामिल होंगे। यहां तीन तलाक मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।
जानें क्या है तीन तलाक और सुप्रीम कोर्ट का फैसलस
आपको बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को *****ंवैधानिक करार दिया था। वहीं केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाने के आदेश दिए थे।
* सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने में तीन तलाक पर कानून बनाने के आदेश के साथ ही एक बार में तीन तलाक को अवैध या गैर-कानूनी कहा।
* आपको बता दें कि तीन तलाक की परम्परा १४०० साल पुरानी है।
* इस परम्परा पर सुप्रीम कोर्ट ने २२ अगस्त को ऐतिहासिक फैसला दिया था।
* सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहा है।
* जबकि 22 अगस्त को देर शाम सरकार ने इस पर अपना रुख साफ कर दिया।
* लॉ मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भले ही दो जजों ने कानून बनाने की राय दी, लेकिन बेंच के मेजॉरिटी जजमेंट में तीन तलाक को *****ंवैधानिक करार दिया।
* इसीलिए भोपाल में तीन तलाक के मुद्दे पर चर्चा के लिए बोर्ड की ओर से बैठक आयोजित की गई है।
* आपको बता दें कि 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड, अनकॉन्स्टिट्यूशनल और इल्लीगल है।
* बेंच में शामिल दो जजों ने कहा कि सरकार तीन तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए।
तीन तलाक पर फैसला, लेकिन इन पहलुओं पर भी हो विचार
* जब तलाक-ए-बिद्दत यानी तीन तलाक खारिज हो चुका है, लेकिन सुन्नी मुस्लिमों के पास अब भी तलाक देने के दो विकल्प बाकी हैं। इनमें एक तलाक-ए-अहसन और दूसरा तलाक- ए-हसन शामिल है।
* तलाक-ए-अहसन के तहत एक मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को महीने में एक बार तलाक कहता है।
* इस दौरान 90 दिन में सुलह की कोशिश होती है। यदि सुलह नहीं हो पाती तो तीन महीने में तीन बार तलाक कहकर पति पत्नी से अलग हो जाता है।
* इस दौरान पत्नी इद्दत (सेपरेशन का वक्त) गुजारती है।
* इद्दत का वक्त पहले महीने में तलाक कहने से शुरू हो जाता है।
* तलाक-ए-हसन के नियम के मुताबिक पति अपनी पत्नी को मेन्स्ट्रूएशन साइकिल के दौरान तलाक कहता है।
* तीन साइकिल में तलाक कहने पर तलाक की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
* जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एक साथ तीन तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाई है।
* सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन में दखल नहीं दिया सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत पर रोक लगाई है।
Updated on:
10 Sept 2017 01:42 pm
Published on:
10 Sept 2017 01:35 pm
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