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आटा, चावल, गेहूं, मैदा, दही, छाछ और लस्सी सब हुआ महंगा, इतने बढ़े रेट

-अनब्रांडेड खाद्य वस्तुओं पर 5 प्रतिशत जीएसटी से बिगड़ा घर का बजट-जीएसटी की मार आटा ₹130 और चावल ₹400 प्रति क्विंटल महंगा

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भोपाल। पैक्ड एवं प्री-लेबल्ड आटा, दाल, चावल व अन्य खाद्य सामग्री पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाने से आम आदमी की रसोई पर असर पड़ना शुरू हो गया है। खाद्य पदार्थ महंगे हो गए हैं। दाम बढ़ गए हैं, ‘पत्रिका’ ने शहर के कुछ बाजारों में दाम का जायजा लिया और गृहणियों से उनके विचार जाने। ज्यादातर महिलाओं का कहना है कि टैक्स बचाने के लिए ज्यादातर लोग लूज में खाद्य पदार्थ खरीदना शुरू कर देंगे। इससे क्वालिटी पर असर आएगा।

खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी लागू होने के बाद आटा, चावल, गेहूं, मैदा, सूजी, दही, छाछ और लस्सी सहित प्री पैक्ड अनाज आदि चीजों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया है, इस वजह से गेहूं का आटा जो अभी करीब 2600 रुपए प्रति क्विंटल था, पांच प्रतिशत जीएसटी लगने के बाद करीब 2730 रु. प्रति क्विंटल हो जाएगा और करीब आठ हजार रुपए प्रति क्विंटल का चावल पांच प्रतिशत जीएसटी के बाद 8400 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।

बिना ब्रांड वाले उत्पादों पर जीएसटी छूट जारी

केंद्र सरकार ने पैक और लेबल वाले खाद्य पदार्थों पर 18 जुलाई से 5 प्रतिशत जीएसटी लगा दी है। इसमें डिब्बा या पैकेटबंद और लेबल युक्त (फ्रोजन को छोड़कर) मछली, दही, पनीर, लस्सी, शहद, सूखा मखाना, सूखा सोयाबीन, मटर, गेहूं और अन्य अनाज तथा मुरमुरे, पैकिंग और लेबल वाले चावल, गेहूं, आटा पर कर दर में बदलाव किया है। खुले में बिकने वाले बिना ब्रांड वाले उत्पादों पर जीएसटी छूट जारी रहेगी। आम आदमी से लेकर गृहिणियों ने इस टैक्स का विरोध किया है।

आम आदमी की जेब पर यह पड़ रहा असर

-आटे की बंद पैकिंग थैली पर 5 प्रतिशत टैक्स देना होगा, दुकानदार रेट तय करेंगे
-25 किलो की थैली पर पहले 650 रुपए, अब देने होंगे 682.50 रुपए
-ग्राहक के दुकान पर जाने के बाद पैकिंग होने पर जीएसटी नहीं लगेगी

एक्सपर्ट व्यू

सरकार की जो मंशा है,उसकी पूर्ति इस संशोधन के बाद भी नहीं हो पाएगी क्योंकि बाजार में लेबल्ड एवं पैक्ड आयटम के स्थान पर लूज में वस्तुएं ज्यादा विक्रय होने लगेंगी। इससे उपभोक्ता को अच्छी गुणवत्ता की चीजों के लिए परेशान होना पड़ेगा। चीजों के दाम बढ़ेगे।

-राजेश कुमार जैन, चार्टर्ड एकाउंटेंट

वित्तमंत्री को पत्र

कन्फेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन ने खाद्यान्न पर लागू जीएसटी के संदर्भ में केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि देश में सभी निर्माताओं, दुकानदारों, प्रोसेसर्स के पास करीब 6 हजार करोड़ का पैकिंग मटेरियल पड़ा हुआ है। अब जीएसटी के दायरे में आने के बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट एवं लीगल मैट्रोलॉजी एक्ट के अनुसार पैकिंग में भी नए सिरे से पैकिंग मैटीरियल बनवाना होगा।