
ये कैसी व्यवस्था: बाघ रोकने बागड़ लगा रहा वन विभाग, भूमि राजस्व के नाम, सीपीए की अनुशंसा पर निगम काट रहा है पेड़
देवेंद्र शर्मा. भोपाल. राजधानी से लगे वन क्षेत्र का बड़ा भाग चंदनपुरा राजस्व विभाग, वन विभाग, राजधानी परियोजना प्रशासन वन परिमंडल के बीच उलझा है। बेहद संवेदनशील क्षेत्र के 190 हेक्टेयर यानि 479 एकड़ जमीन निजी प्रॉपर्टी है। बची करीब 729 एकड़ शासकीय जमीन है। अब कागज पर बताने के लिए यहां राजस्व के नाम दर्ज है, लेकिन पौधे लगाना हो या फिर बाघ व वन्य प्राणियों का संरक्षण करना है तो वह काम वन विभाग करता है। वन विभाग ने यहां बाघ भ्रमण क्षेत्र मानते हुए ं बाघ के लिए 12 फीट तक की फेंसिंग लगाई है, लेकिन वह इसे अपना क्षेत्र नहीं मानता और यही वजह है कि पेड़ों की कटाई पर मौन हो जाता है। सीपीए यहां कोई काम नहीं करता, लेकिन पेड़ उसकी ही अनुशंसा पर कट जाते हैं।
गौरतलब है कि चंदनपुरा से लगे मेंडोरा-मेंडोरी में तो वन विभाग भाग दो बनाना तय किया था। समसगढ़ के बाघ भ्रमण क्षेत्र को चंदनपुरा तक तय किया हुआ है और यहीं से ये बाघ देवास के वन क्षेत्र तक कॉरीडोर बनाकर आवाजाही करते हैं।
बड़ा सवाल: निजी निवास के बंगले कैसे बने?
चंदनुपरा में एक साथ 203 पेड़ों की बलि लेने के बाद यहां पीएसपी लैंडयूज भी सवालों में है। पीएसपी लैंडयूज यानि शासकीय अद्र्ध शासकीय भू उपयोग के तहत स्कूल, कॉलेज, अस्पताल ही खोले जा सकते हैं, तो निजी बंगले कैसे बन गए। दरअसल जितने भी निजी निर्माण हुए हैं, सभी के ले आउट अप्रूवल पीएसपी है, और जहां स्कूल कॉलेज व हॉस्पिटल खोलना था वहां खुद निवास के तहत फार्म हाउस के तौर पर बंगले बना लिए गए हैं। ऐसे यहां दर्जनों निर्माण हैं।
बीते सालों की अनुमति जांच से निकलेगा सच
एनजीटी में मामला दर्ज कराने वाले राशिद नूर खान व सतीश नायक का कहना है कि संभागायुक्त कल्पना श्रीवास्तव से मांग की है कि निर्माण व पेड़ काटने की अनुमतियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच हो, जिससे पता चलेगा कि इसके पीछे क्या सच है। हाल में चंदनपुरा के खसरा 75 पर 203 पेड़ों को काटने की अनुमति में भी फर्जी दस्तावेज लगे थे।
बिना अनुमति वन विभाग ने लगाई फेंसिंग
चं दनपुरा में 295 हेक्टेयर यानि करीब 729 एकड़ जमीन सरकारी नाम पर दर्ज है। 479 एकड़ जमीन निजी है। वन विभाग के डीएफओ हरिशंकर मिश्रा का का कहना है कि ये हमारी जमीन नहीं है, लेकिन हकीकत ये हैं कि इस जमीन पर बाघ की बढ़ती आवाजाही की वजह से वन विभाग ने फेंसिंग लगाई है। इसके लिए जमीन के मालिक राजस्व विभाग से अनुमति तक नहीं ली।
Published on:
16 Mar 2020 06:02 am

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