
मंंगलवार का दिन महिला शक्ति के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। संसद में महिला आरक्षण बिल पास हो गया। लेकिन इस बिल के पास होते है पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने महिल आरक्षण बिल के इतिहास को दोहराया और एक बार फिर संशोधन की मांग उठाई है। इसके लिए उन्होंने बाकायदा पहले सीहोर के प्रसिद्ध सिद्धेश्वर गणेश मंदिर में कहा कि उन्होंने बिल में संशोधन के लिए पीएम मोदी को पत्र लिखा है। इसके साथ ही राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित अपने निवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने पत्रकारों के समक्ष महिला आरक्षण बिल में संशोधन के साथ ही 27 साल पहले के इतिहास की बात की। आप भी जानें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने महिला आरक्षण बिल में किस संशोधन की बात की साथ ही यह भी कि 27 साल पहले क्यों अटक गया था महिला आरक्षण बिल...
पिछड़े वर्ग की महिलाओं का हक छीनना ठीक नहीं
उमा भारती ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय निकायों के चुनावों में ओबीसी महिलाओं के लिए विशेष प्रोविजन है, तो जब महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण हो रहा है तो इसमें भी ये विशेष प्रोविजन हो सकता है। लेकिन इस प्रोविजन को इसमें शामिल नहीं किया गया। ऐसा करने से ओबीसी महिलाएं पीछे छूट जाएंगी। उनका हक छीनना ठीक नहीं। इस संशोधन के बिना अधूरा है बिल आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिका अर्जुन खरगे की चर्चा करते हुए उमा भारती ने कहा कि आज महिला आरक्षण बिल पर खरगे ने उनके पक्ष में बात की। लेकिन 27 साल पहले कांग्रेस, बीजेपी और वामपंथी सब एकजुट थे।
सभी चाहते थे कि बिल को निर्विरोध पास करो। जब बिल अटका तो मुझे इसके लिए अपराधी माना गया कि मेरी वजह से बिल 15 साल से पारित नहीं हो सका। तब कांग्रेस भी इसमें शामिल थी कि बिल में किसी ओबीसी आरक्षण की जरूरत नहीं है। आज पता नहीं क्यों कांग्रेस ने अपनी रंगत बदली। लेकिन मैं आज भी कहूंगी बिना ओबीसी आरक्षण के बिना यह महिला आरक्षण बिल पूरी तरह से अधूरा रहेगा। पिछड़ों के हक की बात करना हमारा अधिकार नहीं रहेगा। पिछड़े वर्ग का जो भरोसा हम पर है वो टूट जाएगा।
उस समय अटल जी से कही थी संशोधन की बात
उमा भारती ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और मुलायम सिंह के साथ ही उनकी पार्टी के लोगों के नाम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के पिछड़े वर्गों के नेता और सांसद मेरे साथ आ गए। उमा बोलीं कि 'तब अटल जी उनके पास आए और बोले कि क्या हुआ बेटा?' उमा ने कहा कि मैंने तब भी अटल जी से यही कहा था कि 'देश में पिछड़ी जातियों की सर्वाधिक संख्या होते हुए भी महिला आरक्षण बिल में उनके लिए प्रोविजन नहीं होना देश की महिलाओं के लिए पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए अच्छा संकेत नहीं है। तो जब एक विशेष महिला आरक्षण बिल पास हो ही रहा है, तो फिर इसमें उस विशेष प्रोविजन को शामिल कर सकते हैं।' उमा भारती ने कहा कि मैंने कहा कि आबादी और रिजर्वेशन के अनुपात में मंडल कमिशन के हिसाब से दे सकते हैं। मैंने उन्हें सुझाव भी दिया था कि मंडल में जो मुस्लिम वर्ग की पिछड़ी जातियां लिस्टेड हो गई हैं, उनकी महिलाओं को भी इसमें जगह मिल सकती है।
इस वजह से पेंडिंग हुआ था बिल
उमा भारती ने कहा कि जब महिला आरक्षण बिल स्टेंडिंग कमेटी के पास गया तब गौड़ा सर ने मुझे ही इस कमेटी का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दे दिया था। उन्होंगने आगे कहा कि 'यह विधेयक 1996 में देवगौड़ा जी ने प्रस्तुत किया, तब भी हमने इसका बहुत स्वागत किया था। लेकिन यह फिर स्टेंडिंग कमेटी को चला गया था, वो संशोधन मैंने ही प्रस्तुत किया था। अब वही संशोधन मैंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र के माध्यम से भेजा है. इस बिल का बहुत स्वागत किया है, लेकिन मैंने उस समय संशोधन की मांग देवगौड़ा जी से की थी, इसलिए बिल पेंडिंग हो गया था। इसलिए मुझे पूर्ण विश्वास है प्रधानमंत्री इस बिल को उस संशोधन को पारित करेंगे।
जानें क्या है महिला आरक्षण बिल
महिला आरक्षण बिल में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी या एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक में 33 फीसदी कोटा के भीतर एससी, एसटी और एंग्लो-इंडियन के लिए उप-आरक्षण का भी प्रस्ताव है। विधेयक में प्रस्तावित है कि प्रत्येक आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए। आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन द्वारा आवंटित की जा सकती हैं। इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 साल बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा।
जन आक्रोश यात्रा पर बोला हमला
इससे पहले सिद्धेश्वर गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा पर जमकर हमला बोला। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि जन आक्रोश यात्रा की क्या जरूरत? जनता में आक्रोश होगा तो वोट दिखाई दे जाएगा। मुझे तो यह डर लग रहा है कि यात्रा पर ही आक्रोश न टूट पड़े।
सनातन राजनीति का विषय नहीं
उमा भारती ने सनातन धर्म को लेकर राजनीतिक पार्टियों को नसीहत देते हुए कहा कि सनातन कोई राजनीतिक मंच से डिस्कस करने का विषय नहीं है। यह विद्वानों संतो महापुरुषों का विषय है। रही तमिलनाडु के डीएमके नेताओं की बात वह तो हमेशा से तिलक काटते रहे। उस विषय को सार्वजनिक तौर पर राजनीतिक मंच पर लाना यह सनातन धर्म के लिए उचित नहीं। उमा भारती ने सभी राजनीतिक पार्टियों से आग्रह किया कि 'मैं सभी पार्टियों से आग्रह करूंगी कि आप तो रोटी कपड़ा और मकान की बहस कीजिए, सनातन धर्म की बहस विद्वानों पर छोड़ दीजिए।'
Updated on:
19 Sept 2023 06:13 pm
Published on:
19 Sept 2023 06:11 pm
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