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पत्रिका का 64वां स्थापना दिवस: विश्वास की डोर अब और पुरजोर, पत्रकारिता मतलब पत्रिका

पत्रिका का स्थापना दिवस: विश्वास की डोर अब और पुरजोर

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भोपाल

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Pawan Tiwari

Mar 07, 2019

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पत्रिका का 64वां स्थापना दिवस: विश्वास की डोर अब और पुरजोर, पत्रकारिता मतलब पत्रिका

भोपाल. एशिया के टॉप-3 अखबारों और एशिया के ही पांच प्रमुख सामुदायिक अखबारों में शामिल पत्रिका ग्रुप आज अपना 64वां स्थापना दिवस मना रहा है। 63 साल पहले 1956 में शुरू हुए राजस्थान पत्रिका को इसकी विश्वसनीयता और उच्च मूल्यों के लिए जाना जाता है और यही कारण है कि इसके लिए कहा भी जाता है कि न्यूज पेपर विद अ सोल। पत्रिका ग्रुप प्रिंट मीडिया के साथ-साथ रेडियो, टीवी और डिजीटल प्रारूप में भी जनता की पसंद है। पत्रिका ग्रुप मीडिया की दुनिया में अपनी विश्वसनीयता के लिए फेसम है। 7 मार्च 1956 को कर्पूर चंद्र कुलिश जी ने राजस्थान पत्रिका नाम से इसकी शुरुआत की थी। यह दिवस पत्रिका की ओर से हर साल मनाया जाता है। इसके स्थापना दिवस पर रीडर्स ने भी दिल खोलकर तारीफ की और इस समूह की विश्वसनीयता पर अपनी मुहर लगाई।

राजस्थान पत्रिका की स्थापना के पहले दिन ही संस्थापक श्रीकर्पूरचंद कुलिश का उद्देश्य स्पष्ट था कि वो एक ऐसा समाचार पत्र प्रकाशित करें, जो केवल जनता के लिए हो। जिसमें केवल खबरें न होकर समाज कल्याण के हित की बातें भी हों। कुलिश जी ने जो बीज बोया, वो आज बरगद की तरह राजस्थान सहित देश के कुल 9 राज्यों के 38 संस्करणों में भी फैल चुका है और अभी भी लगातार फैल रहा है। 63 साल पहले शुरू हुए राजस्थान पत्रिका को उसकी विश्वसनीयता और उच्च मूल्यों के लिए जाना जाता है।

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पत्रिका एशिया के टॉप-3 अखबारों में शामिल, जिन पर पाठकों का सर्वाधिक विश्वास (बीबीसी और रायटर्स का सर्वे)
यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया के पांच प्रमुख सामुदायिक अखबारों में पत्रिका की शामिल है।
फोर्ब्स मैगनीज की रिपोर्ट-पत्रिका ऐसा अखबार है जो विज्ञापन से ज्यादा पाठकों को तरजीह देता है।