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चार व्यंग्य के कोलाज से किया मध्यमवर्ग के व्यक्ति के जीवन पर कटाक्ष

शहीद भवन में नाटक 'मुसाफिर किस्सों वाला' और 'व्यंग्य कृति' का मंचन  

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चार व्यंग्य के कोलाज से किया मध्यमवर्ग के व्यक्ति के जीवन पर कटाक्ष

भोपाल। सघन सोसायटी फॉर कल्चरल एंड वेलफेयर की ओर से रंग त्रिवेणी नाट्य उत्सव-5 के अंतिम दिन दो नाटकों का मंचन किया गया। पहला नाटक विजित सिंह के निर्देशन में 'मुसाफिर किस्सों वाला' हुआ। एक घंटे यह नाटक सोलो प्ले था। वहीं, दूसरा नाटक तरुण दत्त के निर्देशन में 'व्यंग्य कृति ' का मंचन हुआ। इसमें हरिशंकर परसाई के चार व्यंग्य को 15-15 मिनट के कोलाज में तैयार किया। इस नाटक में ऑनस्टेज 2 कलाकारों ने अभिनय किया।

नाटक 'मुसाफिर किस्सों वाला' एक साधारण लड़की आराध्या के संघर्ष की कहानी है। उसके पिता किसी फिल्मी हीरो की तरह हैं, जो उसकी सारी जरूरतें पूरी कर देते है। पिता, बेटी आराध्या का विवाह अविरल से कर देते हैं। अविरल एक सरकारी मुलाजिम होता है।

विवाह के बाद उसे ससुराल में प्रताडि़त किया जाता है। वह किसी तरह से अपने मां-बाप के पास पहुंचती है, वो मानसिक और शारीरिक रूप से इतना टूट चुकी थी कि उसे फिर से संभालना शिशु को जन्म देने की तरह होता है। आराध्या नए जीवन की शुरुआत करती है।

इस नए जीवन में आराध्या का उत्साह व उमंग से आकाश को पार करने की क्षमता रखती है। आराध्या की शिक्षा उनका सबसे बड़ा संबल बनती है वो निरंतर प्रयत्न से आत्म निर्भर बनती है। आराध्या मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा बन जाती है।

व्यंग्य कृति से मध्यमवर्ग पर किया कटाक्ष
वहीं, दूसरा नाटक में 'मध्यमवर्गीय कुत्ता' ऐसे आदमी की कहानी है, जो कि मध्यमवर्ग का है, लेकिन जीवनभर उच्चवर्ग में होने का ढोंग करता है और जब जरूरत पड़ती है तो निम्न वर्ग में शामिल हो उसका लाभ भी उठाता है।

वहीं, 'वह क्या था' में एक ऐसे व्यक्ति को दिखाया गया, जो जीवन में कुछ भी चाहता नहीं है। बस रोजमर्रा की नौकरी में व्यस्त है, उनमें न आगे बढऩे की इच्छा है और न ही कुछ नया करने की। 'बातूनी' ऐसे लोगों की कहानी थी, जो बेतुकी बातें करके लोगों को परेशान करते हैं, उनको कोई सुनना नहीं चाहता।