
लोकसभा चुनाव के चलते राज्य में सोमवार को चौथे चरण के लिए मतदान है। राजनीतिक दल अब अपने-अपने हिसाब से हार-जीत का गणित लगा रहे हैं। तीन दशक के लोकसभा चुनाव पर नजर डाली जाए तो राज्य में भाजपा भारी ही रही है। 2009 का चुनाव अपवाद कहा जा सकता है। इस चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। इस बार भी स्थिति कुछ वैसी ही है। प्रदेश की अधिकांश सीटों पर कांटे का मुकाबला है। 2019 के चुनाव मेें कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। 29 में से 28 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। छिंदवाड़ा सीट ही कांग्रेस के खाते में आई। 2014 में कांग्रेस ने दो सीटें जीती थीं। छिंदवाड़ा और गुना।
चौथे चरण के लिए सोमवार को मतदान में सभी अपना मताधिकार का प्रयोग करें। सभी सीटों पर भाजपा का अच्छा रिस्पांस है और पीएम मोदी ने 10 साल में जो काम करके दिखाया है, उसका लाभ मिलेगा। टंट्या मामा के नाम पर, डॉ आंबेडकर के नाम पर विवि का बनना। बाबा महाकाल का महालोक भी इसी क्षेत्र में बना है। उज्जैन और इंदौर संभाग की सभी सीटें प्रचंड बहुमत से जीतेंगे।
बता दें कि सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन लोक सभा सीट के लिए मतदान किया है। अपने गृहनगर उज्जैन में वोटिंग के बाद सीएम ने लोगों से भी ज्यादा से ज्यादा वोटिंग की अपील की। इस दौरान सीएम मोहन यादव ने ये भी कहा कि मैं बड़ा प्रसन्न हूं कि हमने सकुशल मतदान डाले। उन्होंने दावा किया कि निश्चित रूप से भाजपा भारी बहुमत से जीतेगी और मोदी जी की सरकार बनेगी। वहीं एमपी में सभी 29 लोक सभा सीटों पर भी सीएम ने भाजपा की जीत का दावा किया है।
कमलनाथ चुनाव में भाजपा एक्सपायरी डेट वाली गारंटी लेकर मैदान में है। भाजपा ऐसी पार्टी है जो जिस बात की गारंटी देती है, उसी पर यू-टर्न मार देती है। अपनी अक्ल लगाएं, भाजपा के झांसे में न आएं। भाजपा ने महिलाओं को 3000 रुपया हर माह देने की गारंटी दी थी, लेकिन पूरी नहीं की। 450 में गैस सिलेंडर, 2700 रुपए क्विंटल गेहूं खरीदने, 3100 रुपए क्विंटल धान खरीदने की गारंटी दी थी।
प्रदेश के लोकसभा चुनावों पर नजर डाली जाए तो भाजपा को बढ़त ही मिली है। 1991 में वोट शेयर 41.88 फीसदी था, इसमें लगातार इजाफा हुआ। 2019 के चुनाव में यह बढ़कर 58 फीसदी तक जा पहुंचा। कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस का वोट शेयर 45.34 फीसदी था। 2019 के चुनाव में यह घटकर 34.50 फीसदी हो गया। यानी कांग्रेस को नुकसान हुआ है। वोट शेयर बढऩे का असर विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला।
मध्यप्रदेश में दिसंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड जीत मिली थी। 230 सीटों वाली मध्य प्रदेश की विधानसभा में बीजेपी को 163 सीटों पर जीत मिली थी जबकि कांग्रेस सिर्फ 66 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। कांग्रेस का वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले खराब प्रदर्शन रहा। भाजपा की सीटों में जहां बढ़ोत्तरी हुई, वहीं कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ।
Updated on:
13 May 2024 03:32 pm
Published on:
13 May 2024 08:49 am
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