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Gandhi Jayanti 2023: बापू के जीवन को करीब से महसूस करने के लिए देख सकते हैं ये 5 फिल्‍में

Gandhi Jayanti 2023: गांधी नहीं देखते थे सिनेमा, लेकिन उनके विचारों से फिल्में थीं प्रभावित

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Gandhi Jayanti 2023

Gandhi Jayanti 2023: महात्मा गांधी फिल्म निर्माताओं और थिएयटर नाटकों के लिए प्रिय विषय रहा है। गांधीजी को केंद्र रखकर अब तक कई फिल्में बन चुकी है और कई नाटकों का नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर मंचन हुआ है। यह फिल्में और नाटक काफी हिट भी रही और लोगों ने इसका पसंद भी किया है। गांधी जयंती के अवसर पर ऐसी ही कुछ प्ले और फिल्में जिनको दर्शकों का भरपूर प्यार मिला।

कमल की ‘हे राम’

फिल्म साकेत राम की कहानी के माध्यम से बदला और क्षमा के दोहरे विचारों को सामने लाती है, जिसकी पत्नी के साथ बलात्कार किया जाता है और उसकी हत्या कर दी जाती है। दु:ख और क्रोध से पागल होकर, वह गांधी को मारने के लिए निकल पड़ता है। उसका मानना है कि वह देश में फैली हिंसा के लिए जिम्मेदार है। कहानी इतिहास और साकेत के जीवन के कई महत्वपूर्ण अध्यायों से होकर गुजरती है। फिल्म दिखाती है कि विरोधी विचारों के बीच किसी भी संकट को स्वीकृति और अहिंसा के जरिए दूर किया जा सकता है। कमल हासन ने निर्देशन किया।

‘शोभायात्रा’ ए टेली प्ले

जी थिएटर का यह टेली प्ले छह पेशेवरों के जीवन पर आधारित है जो स्वतंत्रता दिवस समारोह में गांधी, बोस, तिलक, नेहरू, रानी लक्ष्मीबाई और बाबू गेनू की भूमिकाएं निभाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती हैं। हम उनकी वास्तविकता और उन वीर ऐतिहासिक शख्सियतों के बीच अंतर देखते हैं जिनकी वे भूमिका निभाना चाहते हैं। यह कथा आज भी गांधीवादी मूल्यों की प्रासंगिकता को सूक्ष्मता से स्थापित करती है और हमें याद दिलाती है कि इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचने के लिए हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शवाद से कितनी दूर चले गए हैं। उनके सिद्धांत इसमें पीछे छूट गए हैं।

लगे रहो मुन्ना भाई

एक लक्ष्यहीन मुन्ना के जीवन में गांधी दिलचस्प तरीकों से प्रकट होते हैं और जब वह एक खूबसूरत रेडियो ***** जॉकी (विद्या बालन) का प्यार जीतने के लिए खुद को सुधारने की कोशिश करता है, तो गांधीवादी मूल्य उसे हर चीज से निपटने के लिए सशक्त बनाते हैं। एक मुस्कान और थोड़ी 'गांधीगिरी' के साथ मूवी हिट रही।

दिखा ‘गांधी’ दर्शन

रिचर्ड एटनबरो द्वारा निर्देशित यह प्रशंसित जीवनी नाटक गांधी के दक्षिण अफ्रीका में बिताए दिनों से लेकर भारत लौटने को दिखाया है। इसमें गांधी दर्शन को दिखाया गया है। बेन किंग्सले ने गांधी के किरदार के लिए अकादमी पुरस्कार जीता, जबकि भारत की भानु अथैया ने पोशाक डिजाइन के लिए ऑस्कर भी जीता।

महात्मा का निर्माण

श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित, 1996 की यह जीवनी फिल्म फातिमा मीर की किताब 'द अप्रेंटिसशिप ऑफ ए महात्मा' पर आधारित है। यह बताता है कि कैसे दक्षिण अफ्रीका में बिताए 21 वर्षों ने गांधीजी पर गहरा प्रभाव डाला। उनकी राजनीतिक विचारधारा को आकार दिया। उनमें न्याय और समानता के लिए जुनून पैदा किया।