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भोपाल। संत आशाराम नगर, बागसेवनिया निवासी रिटायर्ड प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे अपने घर में मूर्तियों का अद्भुत कलेक्शन किया हुआ। पिछले 15 वर्षों में देशभर से भगवान गणेश की अलग-अलग तरह की 1,500 प्रतिमाएं एकत्र की। साथ ही करीब 10 हजार शादी के कार्ड का अनोखा कलेक्शन भी है। मैंने झागरिया में एक आर्ट गैलेरी भी तैयारी की है। यहां गणेशजी की गोंड, मधुबनी, कलमकारी, चितेरा और पटचित्रकथा की 300 पेंटिंग्स का प्रदर्शन किया है। करीब 25 साल पहले कलेक्शन करना शुरू किया था। मेरे पास सागौन की लकड़ी पर बनाए गए गणेश जी का कलेक्शन, बस्तर के आदिवासियों द्वारा तैयार बेल मेटल के गणेशजी का कलेक्शन भी है। मेरे पास एक इंच से लेकर चार फीट तक के गणेशजी की मूर्तियों का कलेक्शन है। साथ ही, दलाई लामा मोनेस्ट्री से मुखौटा रूप में गणेश प्रतिमा, दक्षिण भारत के समुद्री तटों के सीप और शंख से बने गणेशजी, मूंगा और फिरोजा सहित अन्य रत्नों से बनी गणेश प्रतिमा, चिचली में बर्तन पर बने गणेश, शेषनाग पर खड़े, कल्कि अवतार, माता-पिता को स्वर्ग की सैर पर ले जाते, वराह रूप, फॉसिल पर बने गणेशजी की प्रतिमा भी हैं।
2 हजार प्रतिमाएं स्फटिक और प्रिज्म
वहीं, अयोध्या बाइपास पर रहने वाले सुबोध केंदुलकर ने बताया कि मुझे बचपन से ही गणेश प्रतिमाएं कलेक्ट करने का शौक है। जहां भी नए रूप में प्रतिमा मिलती थी तो घर ले आता था। जब ये संख्या 100 हुई तो मैंने 10 हजार प्रतिमा का टारगेट रखा। अब तक मैं 21500 प्रतिमाएं संग्रहित कर चुका हूं। मेरे पास चावल के दाने पर गणेशजी से लेकर पांच फीट तक प्रतिमा है। मैंने सब्जियों, जूट, कपड़े व धागों से भी कई प्रतिमाएं तैयार कीं। करीब 2 हजार प्रतिमाएं स्फटिक और प्रिज्म की है तो 500 मेंटल की।
सीडी पर गणेशजी का 5001 फोटो का कलेक्शन
वहीं, आयुषी श्रीवास्तव ने बताया कि मैं पेशे से सिविल इंजीनियर हूं। मेरे पास सीडी पर गणेशजी का 5001 कलेक्शन है। साथ ही 20 हजार शादी के कार्ड का कलेक्शन भी है। मैंने शादी के कार्ड का कलेक्शन 2015 से शुरू किया था। हर कार्ड अलग डिजायन का है। लोग शादी के कार्य के बाद इन्हें विसर्जित कर देते हैं या फेंक देते हैं। इसे देख मैंने कलेक्शन करना शुरू किया। आज के दौर में सीडी का उपयोग कम हो गया है, लोग पेनड्राइव और हार्डडिस्क का उपयोग करते हैं। मैंने लगभग पांच हजार सीडी का कलेक्शन किया और हर सीडी पर भगवान गणेश जी की अलग-अलग आकृति, एकाक्षर, एकदन्त, लम्बोदर, गजानन, बुद्धिनाथ, बालगणपति, मंगलमूर्ति, मूशकवाहन, वक्रतुंड, बुध्दि प्रिय की तस्वीर लगाकर सुंदर उपयोग किया। मैंने एक नई चित्रकला विधा की खोज की, जिसे ’आयुम आर्ट’ नाम दिया। इसकी विशेषता यह है कि इसमें पुरातन (मांडना) कला व आधुनिक (माडर्न) कला का संगम है। इस विधा में भी मेरे द्वारा अनेकों भगवान गणपति जी के चित्र वाटर कलर व एक्रेलिक कलर से बनाए गए।
12 हजार फोटो का कलेक्शन
वहीं, पेबल बे निवासी रिटायर्ड पि्रंसिंपल डिस्ट्रीक जज योगेश कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे पास करीब 700 मूर्तियों का कलेक्शन है। मैंने 1994 में संग्रह करना शुरू किया था। मेरे पास नारियल, सुपारी, शीड, कांच, लकड़ी और डोकरा आर्ट में प्रतिमाएं हैं। मेरे पास 50 पेंटिंग का कलेक्शन भी है। वहीं, मैंने अलग-अलग स्वरूपों के 12 हजार फोटो का कलेक्शन भी किया हुआ है।
Updated on:
31 Aug 2022 01:20 am
Published on:
31 Aug 2022 01:17 am
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