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औषधीय गुणों के कारण गणेशजी को अर्पित की जाती हैं 21 तरह की पत्तियां

गणेशोत्सव देता है प्रकृति से सामंजस्य बनाने का संदेश

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औषधीय गुणों के कारण गणेशजी को अर्पित की जाती हैं 21 तरह की पत्तियां

औषधीय गुणों के कारण गणेशजी को अर्पित की जाती हैं 21 तरह की पत्तियां

भोपाल . शहर में गणेश उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई है। शहर में जगह-जगह प्रतिमाएं आकार लेने लगी है और घरों में भी साफ सफाई से लेकर जरूरी तैयारियों की शुरुआत हो गई है। इस बार गणेश उत्सव कई मायनों में शुभ होंगे। ग्रह, नक्षत्र, तिथि, वार के हिसाब से गणेश उत्सव में भगवान गणेश की विशेष कृपा मिलेगी। भगवान गणेश बुद्धि के देवता है। हमारे धार्मिक पर्वों, उत्सवों में प्रकृति का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य अंजना गुप्ता ने बताया कि भगवान गणेश की जब स्थापना की जाती है, उस समय भगवान को 21 प्रकार की पत्तियां अर्पित की जाती हैं। यह औषधीय पत्तियां होती हैं, जिसका हमारे स्वास्थ्य के लिए विशेष महत्व है।

इसलिए मंगलमूर्ति की स्थापना करने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के पौधे भी लगाने चाहिए, इससे भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होगी। इस वर्ष का राजा और मंत्री मंगल है, मंगल मिट्टी से जुड़ा हुआ है। गणेश चतुर्थी पर औषधीय पत्तियां चढ़ाने के साथ-साथ हम इनके पौधे भी लगाए ताकि विभिन्न बीमारियों में यह काम आ सके और हमे भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिले।

एेसे काम आती हैं पत्तियां

बेल पत्ती-मधुमेह
दूर्वा-त्वचा रोग
धतूरा-पत्ते सांस की समस्या
बरगद-पाचन तंत्र
हल्दी-रक्त विकार
अपामार्ग (अति झारा)-दंत चिकित्सा गुर्दे पथरी
अशोक-खांसी, बुखार प्रतिरोधक क्षमता, तनाव
आम- रक्त का संचार
केवड़ा-जहरीले कीड़े रोकने व त्वचा के रोग
विष्णुकांता- अस्थमा के रोग
अनार-गले का दर्द और पीलिया
देवदार- अपच रोकने
भटकटैया-भूख बढ़ाने बाल झडऩे रोकने के लिए
सिंदूर- जोड़ों का दर्द प्रसव की पीड़ा
निर्गुंडी- गुदा रोग, मुहांसे,
अर्जुन- हृदय रक्षा जोड़ों का दर्द
पीपल-कब्ज, अस्थमा ऐसे काम आती हैं पत्तियां

मूर्तिकार देने लगे प्रतिमाओं को अंतिम आकार
गणेश उत्सव को अब चार दिन का समय शेष रह गया है। जिला प्रशासन ने गणेश उत्सव को लेकर गाइड लाइन भी जारी कर दी है। ऐसे में मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को अंतिम आकार देने में जुट गए हैं। शहर के कई पंडालों में इन दिनों प्रतिमाओं की फिनिशिंग और रंग रोंगन का काम चल रहा है। इस बार मूर्तिकारों ने अधिकतम छह फीट तक ही प्रतिमाओं का निर्माण किया है। इस बार कई संस्थाओं द्वारा मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं भी लागत मूल्य पर उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा शहर में जगह-जगह ईको फे्रंडली गणेश प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।