नवरात्र के साथ ही गरबा की शुरुआत भी हो गई पर इस साल आचार संहिता के कारण उत्साह में कमी है। नवरात्र इस बार प्रशासन की पहरेदारी में मन रहा है, आचार संहिता के नाम पर सख्ती चल रही है। गरबा में सबसे ज्यादा खलल पड़ा है। राजधानी भोपाल में इसके कारण गरबा का समय ही बदल दिया गया है।
नवरात्र के साथ ही गरबा की शुरुआत भी हो गई पर इस साल आचार संहिता के कारण उत्साह में कमी है। नवरात्र इस बार प्रशासन की पहरेदारी में मन रहा है, आचार संहिता के नाम पर सख्ती चल रही है। गरबा में सबसे ज्यादा खलल पड़ा है। राजधानी भोपाल में इसके कारण गरबा का समय ही बदल दिया गया है।
नवरात्र की खुशियों में आचार संहिता की वजह से तब ही खलल पड़ गया, जब प्रशासन ने रात दस बजे के बाद गरबा महोत्सवों के आयोजन पर पाबंदी के निर्देश दिए। प्रश्न उठने लगे कि गरबा महोत्सव होंगे या नहीं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने कहा है कि धार्मिक आयोजनों और गरबा महोत्सव पर कोई मनाही नहीं है बशर्ते इनका राजनीतिक उपयोग न हो।
इधर लोगों का कहना है कि गरबा महोत्सव रात में ही होते रहे हैं और रात 10 बजे के बाद पुलिस आयोजन स्थलों पर लाउडस्पीकर व डीजे बंद करवाने पहुंच जाती है। नियमानुसार आचार संहिता के दौरान रात दस से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर और डीजे का इस्तेमाल वर्जित है। दिन में भी इन्हें बजाने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी जरूरी की गई है।
उधर मंदसौर में पांडाल में ब्लैक आउट की स्थिति है। रात दस बजे के बाद गरबा महोत्सव पर पाबंदी के विरोध में मंदसौर के गरोठ में चार गरबा आयोजक आगे आए। उन्होंने सोमवार को स्थानीय प्रशासन के निर्णय को अनुचित बताते हुए ब्लैक आउट कर दिया। उन्होंने कहा है कि अब अनुमति मिलने के बाद ही गरबा खेला जाएगा।
भोपाल में रात 8 से 10 बजे तक ही गरबा
इस समस्या का एक हल गुजराती समाज ने निकाला है। समाज ने प्रशासनिक पाबंदियों को देखते हुए गरबा का समय ही बदल दिया है। गुजराती समाज के आयोजन स्थल में धार्मिक भजनों पर ही गरबा किया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में लोग भी शामिल हो रहे हैं। आचार संहिता की वजह से गरबा का यह आयोजन रात 8 बजे से 10 बजे तक ही किया जा रहा है।
भोपाल में कलेक्टर आशीष सिंह ने इस संबंध में कहा कि तय समय के बाद लाउडस्पीकर का संयमित प्रयोग हो। शांति समूह की बैठक में भी ऐसे निर्देश दिए हैं।