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13 फीसदी जीएसटी बचाने के लिए घरेलू गैस से भर रहे थे कमर्शियल सिलेंडर, टैक्स की चोरी

- लंबे समय से चल रही थी कालाबाजारी, पहले भी प्रियंका गैस एजेंसी पर हो चुका है केस दर्ज

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भोपाल। घरेलू गैस की कालाबाजारी कर 1090 रुपए के कमर्शिलय सिलेंडर में भरकर बेचने से रोजाना 13 फीसदी जीएसटी की चोरी का गोरखधंधा राजधानी में चल रहा था। क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में इसका खुलासा हुआ है। घरेलू गैस सिलेंडर में 14.2 केजी गैस रहती है, अक्टूबर माह में एक रिफिल का रेट 612.50 रुपए है। वहीं कमर्शिलय सिलेंडर में 19 किलो गैस का रेट इस माह 1090 रुपए है, इस पर कोई सब्सिडी भी नहीं रहती है।

डिपो से कमर्शिलय सिलेंडर रिफिल कराने से एक सिलेंडर पर 18 फीसदी जीएसटी चुकानी पड़ती है। घरेलू गैस पर ये 5 फीसदी लगती है। इस तरह घरेलू गैस सिलेंडर की गैस कमर्शियल में कर एक सिलेंडर पर 13 फीसदी जीएसटी बचाकर टैक्स की चोरी की जा रही थी। राजधानी में ही हर माह 20 हजार कमॢशयल सिलेंडरों की डिमांड है, वहीं 10 हजार घरेलू गैस सिलेंडर प्रतिदिन की डिमांड है।

प्रियंका गैस एजेंसी के सिलेंडरों में पकड़ी गई चोरी में टैक्स की चोरी तो हो रही थी, वहीं लालघाटी पर जहां ये गैस ट्रांसफर करते थे उस जगह भी आग लगने का खतरा था। किसी दिन बड़ा हादसा भी हो सकता था। इस संबंध में खाद्य विभाग ने गैस एजेंसी संचालक के खिलाफ आवश्यक गैस वस्तु अधिनियम का केस दर्ज किया है।

तौल में कम निकल रहे एजेंसी के सिलेंडर, अमला जांच रहा चाय ठेले

कुछ गैस एजेंसियों के सिलेंडर तौल में कम मिल रहे हैं, लेकिन खाद्य विभाग का अमला सड़क किनारे रेस्टोरेंट, ठेलों के सिलेंडरों की जांच कर रहा है। आम उपभोक्ता पूरा पैसा देने के बाद भी लुट रहा है। प्रियंका गैस एजेंसी की दो मेटाडोर में 102 घरेलू व 12 व्यावसायिक सिलेंडर जब्त किए हैं। करीब 47 छोटे सिलेंडरों में 475 ग्राम से 3 किलो तक गैस कम मिली है। यह गैस गाड़ी में ही रखे व्यावसायिक सिलेंडरों में भरी गई थी। मौके पर दस बड़े सिलेंडरों में सील भी नहीं मिली थी।

कलेक्टर के निर्देश के बाद भी नहीं करते जांच

गैस एजेंसियों, पेट्रोल पम्प की जांच के लिए कलेक्टर तरूण पिथोड़े ने तीन माह पूर्व एसडीएम के नेतृत्व में टीमें बनाई थी। खाद्य और नापतौल निरीक्षक भी टीम में शामिल थे, इनको लगातार जांच करनी थी, लेकिन नहीं हुई।


प्रियंका गैस एजेंसी का प्रकरण बनाकर कलेक्टर कोर्ट में प्रस्तुत किया है। इससे पहले भी इसी एजेंसी पर कार्रवाई की जा चुकी है। - ज्योतिशाह नरवरिया, जिला आपूर्ति नियंत्रक