
भोपाल. राष्ट्रीय पक्षी मोर को भविष्य के किसी भी खतरे से बचाने के लिए भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आइसर), भोपाल ने इसके जीनोम को संरक्षित कर लिया है। चीन ने हरे रंग वाले एशियाई मोर के विलुप्त होने की आशंका जताई थी। इसके बाद आइसर के वैज्ञानिकों ने भारतीय नीले मोर के संरक्षण की दिशा में काम शुरू किया। आइसर ने राष्ट्रीय पक्षी के अलावा शेर, पीपल और बरगद आदि के जीनोम को भी संरक्षित किया है।
इस तरह विकसित हुई तंत्रिका प्रणाली
आइसर के वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार नीले और हरे मोर में तंत्रिका प्रणाली प्रतिरक्षा तंत्र और कंकाल की मांसपेशी जीनों के अनुरूप विकास हुआ है। भारतीय मोर (नीले मोर) में उच्च आनुवांशिक अनुकूलन क्षमता है। जबकि एशियाई मोर (हरे रंग) प्रजातियों में यह कम देखने को मिली। इस कारण हरे रंग के मोर पर विलुप्त होने का खतरा है।
मोर के खूबसूरत पंखों के पीछे छुपा रहस्य
आइआइएसइआर के जीवविज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.विनीत के शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय पक्षी मोर के खूबसूरत पंखों के पीछे छुपे आनुवांशिक रहस्यों को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने एक उच्च गुणवत्ता युक्त जीनोम असेंबली का निर्माण किया। शोध के परिणाम दो एशियाई मोर प्रजातियों के बीच विशेष जीनोमिक भिन्नता को प्रकट करते हैं।
इसलिए हरे मोर पर खतरा
डॉ. विनीत के अनुसार हरे मोर की आबादी निवास स्थान, भोजन और व्यावसायिक उपयोग के लिए मानवीय शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील है। इसलिए उस पर ज्यादा असर दिखता है। ये मानवीय हस्तक्षेप के प्रति बहुत कम सहनशील हैं। इसलिए इस प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा है।
अभी तक नहीं हुआ था अध्ययन
जीनोमिक अध्ययन, एक जीव के पूरे डीएनए का अध्ययन होता है। आइसर के शोधकर्ताओं ने पहली बार भारतीय मोर का पूर्ण तुलनात्मक जीनोमिक विश्लेषण किया। और इस प्रजाति के जीनोमिक अनुक्रम की व्याख्या की।
Published on:
07 Aug 2023 12:33 am
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