
कोरोना का असर: मेडिकल कॉलेजों को ना जूडा मिल रहे ना बढ़ रहीं पीजी सीट
भोपाल. विदिशा के शासकीय मेडिकल कॉलेज से प्रतिनियुक्ति पर गांधी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर की गई पोस्टिंग को लेकर विवाद हो गया है। मप्र मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने इस आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए डीन और संभागायुक्त को ज्ञापन दिया है।
एमटीए के पदाधिकारियों का कहना कि जिस पद पर प्रतिनियुक्ति के जरिए नियुक्ति हुई है उस पद के लिए पिछले 17 सालों से यहां पर मेडिकल टीचर्स पदोन्नति की राह देख रहे हैं। यह प्रतिनियुक्ति आदेश जारी कर चिकित्सा शिक्षकों के साथ अन्याय किया गया है। एमटीए के सचिव डॉ. राकेश मालवीय का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग को यह प्रतिनियुक्ति आदेश निरस्त करना चाहिए। अन्यथा कोरोना काल में अपनी जान की बाजी लगाकर सेवाएं देने वाले मेडिकल टीचर्स के साथ छलावा कहा जाएगा।
इसके पहले भी हुए हैं विवाद
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के डेंटल डिपार्टमेंट में एक सीनियर रेजिडेंट के पद की नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। प्रशासन ने पहले इस पद पर इंटरव्यू के लिए 13 कैंडिडेट शार्ट लिस्ट किए। फिर शासकीय काॅलेज से पोस्ट ग्रेजुएट को वरीयता देने के नियम का हवाला देकर दो कैंडिडेट का इंटरव्यू लिया। विरोध होने पर प्रबंधन ने रिजल्ट ही होल्ड कर दिया था।
गांधी मेडिकल कॉलेज स्वशासी सीनियर रेजिडेंट भर्ती नियम-2020 के अनुसार, पहले गांधी मेडिकल कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले कैंडिडेट को वरीयता दी जाएगी। इसके बाद प्रदेश के दूसरे शासकीय मेडिकल कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएट करने वाले, फिर प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेज के कैंडिडेट को वरीयता दी जाएगी। जानकारों का कहना है, इसमें पेंच यह है कि मेडिकल के नियम दंत चिकित्सा विभाग में लगा दिए, जबकि नियम पुस्तिका में दंत चिकित्सा से पोस्ट ग्रेजुएट का उल्लेख ही नहीं है।
Published on:
14 Aug 2021 12:40 am
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