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पूंछ में आग लगते ही रावण के घमंड, अहंकार की प्रतीक सोने की लंका को जलाकर राख कर दिया

विविध कला विकास समिति के कलाकारों द्वारा दी गई लंका दहन की प्रस्तुतिभेल टाउनशिप के पिपलानी में चल रही रामलीला में लंका दहन का मंचन किया गया। राम भक्त हनुमान माता सीता की खोज करते हुए लंका पहुंचते हैं। वहां सीता के पास जाकर मुद्रिका फेंकते हैं, जिसे देखकर सीता अचरज में पड़ गईं कि आखिर यह मुद्रिका यहां कैसे आई। तभी हनुमान जी प्रकट हुए और अपना परिचय दिया।

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पूंछ में आग लगते ही रावण के घमंड, अहंकार की प्रतीक सोने की लंका को जलाकर राख कर दिया

पूंछ में आग लगते ही रावण के घमंड, अहंकार की प्रतीक सोने की लंका को जलाकर राख कर दिया

सीता ने प्रभु के हाल जाने। इसके बाद हनुमान जी सीता से भूख लगने की बात कहते हुए बगीचों में लगे फल खाने की अनुमति मांगते हैं। आदेश पाते ही बाग में पहुंचकर फल खाने के साथ ही पूरा बाग उजाड़ देते हैं। इसे देखकर गुस्से में रावण के सैनिकों ने युद्ध किया और रावण के बेटे अक्षय कुमार का वध कर दिया। इसे देख कर मेघनाद क्रोधित हो गया और हनुमान जी पर ब्रह्म पास का प्रयोग कर दिया।

इसमें हनुमान जी खुदको बंधकर रावण के दरबार पहुंचते हैं। वहां रावण के भाई विभीषण ने कहा, बंदरों की सबसे प्रिय वस्तु उसकी पूंछ होती है, क्यों न इसकी पूंछ में आग लगा दी जाए। रावण क्रोधित होकर हनुमान जी की पूछ में आग लगाने का आदेश देता है। जैसे ही हनुमान जी की पूंछ में आग लगी, उन्होंने रावण के घमंड और अहंकार की प्रतीक सोने की लंका को जलाकर राख कर दिया। लंका दहन के साथ भव्य आतिशबाजी की गई। लंका दहन की रामलीला देखने हजारों की संख्या में भेल कर्मचारी, उनके परिवार के साथ अन्य लोग मौजूद रहे। प्रचार सहिव योगेश सराठे ने बताया 25 अक्टूबर को श्री राम का राज्याभिषेक किया जाएगा।

इन कलाकारों ने दी रामलीला की प्रस्तुति
हनुमान के रोल में राहुल सिंह बांके, रावण हिम्मत राव पाटिल, सीता काजल ठाकुर ने बेहतर अभिनय किया। रूप सज्जा निर्देशक केएस चंद्रवंशी ने सभी किरदार के कलाकारों का मेकअप किया। मुख्य आतिथ्य भेल के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव सिंह सपत्नीक मौजूद रहे। साथ ही डॉ. एलएन मालवीया, समिति अध्यक्ष अविनाश चंद्रा, महाप्रबंधक विपुल अग्रवाल, शिव प्रसाद साहू, आर एस अरोरा, श्याम सुंदर, केएस चंद्रवंशी, काजल ठाकुर, सुरेश सोनपुरे, राजीव आर्य, हिम्मत राव पाटिल, वीएस चाहर योगेश सराठे रहे।