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भोपाल। अब इ-इनवॉइस के बिना भेजे जाने वाले माल पर पेनाल्टी लगाई जाएगी। जांच के दौरान पकड़े जाने पर माना जाएगा कि व्यापारी ने बिना बिल के ही माल की बिक्री की है। इस तरह के माल को रास्ते में रोका भी जा सकता है। खास बात यह है कि इस माल की खरीदी करने वाले को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) भी नहीं मिलेगी। जीएसटी के इस नए नियम ने शहर के कारोबारियों के लिए परेशानियां बढ़ा दी हैं, क्योंकि इसकी जद में बड़ी संख्या में व्यापारी आ रहे हैं।
इनके लिए हुआ जरूरी हुआ नियम
एमपी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया पहले 20 करोड़ तक के टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए इ-इनवॉइस अनिवार्य नहीं था। एक अप्रेल 2022 से 20 करोड़ या उससे ऊपर टर्नओवर वालों के लिए इ-इनवॉइस अनिवार्य कर दिया है। 20 करोड़ या ऊपर का टर्नओवर तब से देखा जाएगा, जब से जीएसटी लागू है। यानी एक जुलाई 2017 से वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2022 तक। यदि किसी भी वित्तीय वर्ष में टर्नओवर 20 करोड़ या अधिक हुआ है तो इ-इनवॉइस लागू होगा। कारोबारियों को यह ध्यान रखना होगा कि इ-इनवॉइस लागू किए बिना माल न बेचें। उन्होंने ऐसा किया तो उन पर कार्रवाई भी हो सकती है।
जाने इ-इनवॉयस को
जीएसटी के तहत इ-इनवॉइस सिस्टम में किसी सप्लाई की सामान्य रसीद को जीएसटीएन नेटवर्क से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सत्यापित किया जाता है। जीएसटी नेटवर्क के इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल से ऐसी हर रसीद के लिए एक विशिष्ट नंबर या पहचान संख्या भी जारी होती है। इस प्रक्रिया को इ-इनवॉइसिंग या इ-इनवॉइस अंडर जीएसटी के नाम से भी जाना जाता है। ये रसीदें पहले किसी इआरपी अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार की जाती हैं।
Published on:
27 Jun 2022 03:54 pm
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