
सरकार फिर करने जा रही है रेत खदानों की नीलामी, इन जिलों के लिए होगा फायदेमंद
भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार बीते चार वर्षों के बाद एक बार फिर से छोटे समूहों में रेत खदानों की नीलामी करने की तैयारी कर रही है। दरअसल, सरकार ये फैसला रेत की आसानी से उपलब्धता के जरिए निर्माण कार्यों में सुलभता लाने के लिए कर रही है। इसके लिए सरकार द्वारा उन जिलों की निशानदेही की जा रही है, जहां 2019 के रेत नियम के तहत ठेके निरस्त किए गए थे। उन जिलों के लिए सरकार की मंशा है कि, वहां की रेत खदानों को छोटे समूह बनाकर नीलाम करेगी।
खास बात ये है कि, ये नीलामी तीन महीने के लिए ही की जाएगी। इस योजना का तात्कालिक लाभ मंदसौर जिले को होगा। क्योंकि, वहां उस अवधि में तीन टेंडर फेल हुए हैं। साथ ही, अलीराजपुर को भी इसका फायदा होगा। पहली बार ई-नीलामी की प्रक्रिया असफल होने पर दूसरी बार की ई-नीलामी के लिए 5 दिन की अधिसूचना जारी की जाएगी।
कलेक्टर कराएंगे ई-नीलामी
बता दें कि, इस नीलामी का प्रभार संबंधित जिले के कलेक्टर के पास होगा। कलेक्टर ही जिलेभर की भौगोलिक स्थिति के साथ साथ राजस्व सीमा को ध्यान में रखते हुए छोटे समूह बनाकर ई-नीलामी कराने की व्यवस्था करेंगे। नीलामी के लिए उन खदानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें सभी वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त होंगी।
अगले महीने से शुरु होगा पायलट प्रोजेक्ट
गुरुवार को कैबिनेट ने खनिज विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। साथ ही, ग्रामीण अंचलों में लोक परिवहन सेवा उपलब्ध कराने की भी मंजूरी मिली है। पायलट प्रोजेक्ट विदिशा में 1 मई से 6 महीने के लिए शुरू होगा। ग्रामीण परिवहन सेवा के तहत ग्रामीण मार्गों पर 7+1 से 20+1 बैठक क्षमता के वाहनों का संचालन करने पर टैक्स में छूट रहेगी। वहीं, योजना के तहत एक ट्राइबल जिले को भी शामिल किया जाएगा। इन मार्गों पर परिवहन का संचालन इस प्रकार होगा कि, मुख्य मार्ग पर चलने वाले बड़े वाहनों की टाइमिंग कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सके।
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Published on:
02 Apr 2022 08:05 am
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