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सरदार सरोवर पर मोदी की नाक में दम कर देगी मध्यप्रदेश सरकार, जानें कैसे

जांच बैठाएगी कांग्रेस सरकार, तलाशेगी भाजपा की भूमिका लोकसभा चुनाव से पहले मोदी से टकराव

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देखिए क्यों फूंका हिंदु जागरण मंच ने सीएम का पुतला,देखिए क्यों फूंका हिंदु जागरण मंच ने सीएम का पुतला,kamalnath,kamalnath,Kamalnath

मंत्री ने तलब की रिपोर्ट, हाईपॉवर कमेटी बनाकर जांच कराएंगे
बांध की ऊंचाई पर भी दस्तावेज खंगाले जाएंगे
जितेन्द्र चौरसिया, भोपाल. लोकसभा चुनाव के ऐन पहले मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार से टकराने की तैयारी कर ली है। गुजरात को भारी फायदा पहुंचाने वाले सरदार सरोवर बांध के ठेकों की जांच कराने का फैसला हो गया है। मोदी सरकार बनने के बाद बांध की ऊंचाई को लेकर मध्यप्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार की खामोश भूमिका के दस्तावेज भी तलाशे जाने लगे हैं। दोनों मामलों में एक हाईपॉवर कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी। दरअसल, विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार के हाथ से तीन महत्वपूर्ण राज्य मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान फिसलकर कांगे्रस के पास चले गए हैं, इसलिए लोकसभा चुनाव के पहले मोदी की गुजरात नब्ज पर अटैक करने की रणनीति तैयारी है।
- भाजपा के भ्रष्टाचार पर जांच, रिपोर्ट तलब
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने सरदार सरोवर बांध से जुड़ी सभी परियोजनाओं के ठेकों की पूरी रिपोर्ट तलब की है। इसमें पूछा गया है कि 15 सालों में परियोजना के तहत कहां-कितने निर्माण हुए और कौन सा निर्माण कार्य कब शुरू हुआ, कब पूरा हुआ। ठेका किसका व कितने का था। इसमें कितना भुगतान हुआ और कौन सी शिकायतें मिली थीं। दरअसल, नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेघा पाटकर लगातार आरोप लगाती रही हैं कि 15 सालों में परियोजना के सारे काम भाजपा से संबंधित ठेकेदारों को दिए गए। कांग्रेस भी इसमें भ्रष्टाचार के आरोप विपक्ष में रहते हुए लगाती रही है। इसमें 1500 करोड़ से ज्यादा के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इतना ही नहीं कैग ने भी 470 करोड़ से ज्यादा की गड़बडिय़ों को विभिन्न रिपोर्ट में उजागर किया था, जिसे पूर्ववर्ती सरकारों ने दबा दिया था। इनकी जांच कराने की तैयारी कांग्रेस सरकार कर रही है।

- सरदार सरोवर बांध से गुजरात को फायदा
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले 15 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान मोदी ने सरदार सरोवर बांध को लेकर लगातार गुजरात के फायदे के लिए काम किया, जिससे मध्यप्रदेश को नुकसान के हालात बने। तब तक मध्यप्रदेश सरकार सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने का विरोध करती रही थी, लेकिन जब मोदी पीएम बने तो महज 20 दिन के कार्यकाल के बाद ही ऊंचाई बढ़ाने की मंजूरी दे दी थी। मध्यप्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इसका विरोध नहीं किया। जबकि, ऊंचाई 121.92 से बढ़ाकर 138.68 करने पर मध्यप्रदेश का डूब प्रभावित क्षेत्र बढ़ जाना था, इसलिए कांग्रेस ने अब भाजपा के जाने के बाद इस पूरे केस के दस्तावेज तलब किए हैं। पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण इसमें कानूनी पक्ष भी देखा जाना है।
- वचन-पत्र में अहम वादा
कांग्रेस ने चुनाव के पहले जो वचन-पत्र रूपी घोषणा पत्र दिया था, उसमें भी सरदार सरोवर बांध परियोजना सहित नर्मदा घाटी के भ्रष्टाचार की जांच का वादा था। इसमें एक हाईपॉवर कमेटी बनाकर जांच कराने की बात कही गई थी, इसलिए परियोजना की पूरी रिपोर्ट बुलाकर जांच कराने के लिए कदम उठाए गए हैं। अगले महीने तक हाईपॉवर कमेटी भी बनाई जा सकती है।
- सरदार सरोवर बांध
- 80 मीटर से ज्यादा ऊंचाई रखने पर 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
- 90 मीटर ऊंचाई 2001 में करने की कोर्ट ने मंजूरी दी
- 110.4 मीटर ऊंचाई करने की मंजूरी 2004 में दी गई
- 121.92 मीटर ऊंचाई की मंजूरी 2006 में नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण से मिली
- 138.68 मीटर ऊंचाई 2014 में मोदी सरकार ने मंजूर कर दी
- 138.68 मीटर ऊंचाई होने से मध्यप्रदेश के 192 गांव व 40 हजार लोग डूब से प्रभावित


सरदार सरोवर बांध परियोजना के सभी निर्माण कार्यों की पूरी रिपोर्ट बुलाई है। इनके भ्रष्टाचार की जांच कराना हमारी प्राथमिकता में है। बांध की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर भी जानकारी मांगी जा रही है। इसमें देखा जाएगा कि कही गुजरात को फायदा पहुंचाने के लिए पिछली भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश के हितों को नजरअंदाज तो नहीं किया है।
- सुरेंद्र सिंह बघेल, मंत्री, एनवीडीए