भोपाल. प्रदेश में नदियों के पानी को लेकर विवाद छिड़ा है। तमाम उद्योगों से लेकर नगरीय निकाय तक अपनी सुविधा से परियोजनाएं बनाकर पानी का उपयोग कर रहे हैं। इससे अन्य इलाकों में दिक्कत हो रही है। लगातार शिकायतों के बाद हरकत में आए जल संसाधन विभाग ने अब बिना मंजूरी प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी […]
भोपाल. प्रदेश में नदियों के पानी को लेकर विवाद छिड़ा है। तमाम उद्योगों से लेकर नगरीय निकाय तक अपनी सुविधा से परियोजनाएं बनाकर पानी का उपयोग कर रहे हैं। इससे अन्य इलाकों में दिक्कत हो रही है। लगातार शिकायतों के बाद हरकत में आए जल संसाधन विभाग ने अब बिना मंजूरी प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी लेने पर पाबंदी लगा दी। इस दायरे में उद्योगों के साथ शहरी सरकार भी आएगी। विभाग के इस कदम से प्रदेश की कई पेयजल परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। जल संसाधन विभाग ने नदियों व प्राकृतिक जलस्रोतों के पानी के उपयोग को लेकर यह नियमावली जारी की है।
जल संसाधन विभाग के नियमों के तहत नर्मदा कछार सहित सभी नदियों व प्राकृतिक जलस्रोत उसके अधीन हैं। विभाग को अनेक उद्योगों द्वारा बिना मंजूरी लिए नदियों का पानी उपयोग करने की शिकायतें मिली थीं। इसलिए विभाग ने नए नियम जारी किए हैं। अब नगरीय निकाय जल संसाधन विभाग से जल आवंटन की अनुमति के बिना पानी का उपयोग नहीं कर सकेंगे।
प्रदेश में उद्योगों को नदियों से पानी लेने की अनिवार्यता है और नगरीय निकायों को भी इसके लिए पहले विभाग से मंजूरी