
रतलाम:- ग्रामीण इलाकों में नील गाय ( घोड़ा रोज )का कहर।
भोपाल। मध्ययप्रदेश के साढ़े तीन लाख से ज्यादा निरस्त हो चुके वन अधिकार पट्टों की जांच में नया खुलासा हुआ है। वनवासी के नाम पर जंगल में जमीन लेने वालों में सरकारी कर्मचारी और व्यापारी भी शामिल हैं।
२० जिलों की जांच में तरकीबन २१०० से ज्यादा एेसे आवेदन पकड़ में आए हैं। निरस्त किए गए वनाधिकार पट्टों की जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में पेश करना है इस संबंध में सभी जिलों में इसकी जांच की जा रही है।
वन अधिकार पट्टे के लिए आए एक-एक आवेदन की फिर से समीक्षा की जा रही है। अभी तक आदिवासी बहुल 20 जिलों के आवेदनों की जांच और समीक्षा की जा चुकी है।
इसमें यह देखा जा रहा है कि विभिन्न समितियों ने जिन आदिवासियों के पट्टे निरस्त किए हैं, उसका कारण सही था अथवा किसी कमी अथवा दुर्भावना के चलते निरस्त किए गए हैं। सबसे ज्यादा आदिवासियों के पट्टे इसलिए निरस्त किए गए हैं क्योंकि जिस जमीन पर वे अपना दावा पेश कर रहे थे वह वन भूमि नहीं है। यह भूमि या तो राजस्व की है या फिर निजी अथवा किसी न किसी संस्था की है।
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साक्ष्य के अभाव में निरस्त
हजारों आदिवासियों के आवेदन इसलिए निरस्त कर दिए हैं क्योंकि उन्होंने अपने उक्त वन क्षेत्र में रहने के संबंध में कोई सबूत समितियों के सामने पेश नहीं कर पाए हैं। उन्हें एक बार फिर से 13 दिसम्बर 2005 के पहले से वहां रहने के संबंध में सबूत देने के लिए कहा है।
इस तरह के मौके आदिवासियों को वन अधिकार समितियों द्वारा कई बार दिए जा चुके हैं। बताया जाता है कि वन अधिकार पट्टे सौ फीसदी आवेदन वन अधिकार समिति, ग्राम सभा और उपखंड स्तरीय समिति के स्तर पर निरस्त किए गए हैं, जिला स्तरीय समिति में सिर्फ आवेदनों का सत्यापन किया गया है।
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इन बिन्दुओं पर सुप्रीम कोर्ट में देना है जानकारी -
- दावा की गई भूमि, वन भूमि न होने के कारण निरस्त दावे
- साक्ष्य के अभाव में निरस्त दावे
- दिनांक 13 दिसम्बर 2005 के पूर्व से काबिज न होने के कारण निरस्त दावे
- दावा की गई भूमि पर काबिज न होने के कारण निरस्त दावे
- परिवार के सदस्यों द्वारा दोहरे आवेदन प्रस्तुत करने के कारण निरस्त दावे
- जीविका के लिए वन भूमि पर आश्रत न होने के कारण निरस्त दावे, जिसमें नौकरी, व्यवसाय सहित अन्य कारण भी शामिल हैं
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तीन पीढिय़ों के फेर में फंसे गैर आदिवासियों के पट्टे
गैरआदिवासियों के ज्यादातर पट्टे तीन पीढिय़ों के चक्कर में निरस्त किए गए हैं। 20 जिलों में करीब 70 हजार आवेदन इस लिए निरस्त किए गए हैं क्योंकि वे तीन पीढिय़ों से वहां नहीं रह रहे थे।
सरकार ने ये शर्त सिर्फ गैर आदिवासियों के लिए वन अधिकार पट्टा देने के लिए लगाया था। वांकी 6 शर्तें वहीं थीं, जो आदिवासियों के लिए लगाई गई हैं। इन जिलों में करीब एक लाख पट्टे निरस्त किए गए हैं। शासकीय नौकरी और व्यवसाय के कारण 97 लोगों के पट्टे निरस्त किए गए हैं।
Published on:
04 Mar 2019 11:02 am
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