बच्चों की मेंटल हेल्थ के लिए सरकार ने शुरु किया मनोदर्पण

40 हजार स्कूलों में तैयार किए जाएंगे खेल मैदान

हर स्कूल में खेल मैदान जरुरी

 

By: Arun Tiwari

Published: 12 Apr 2021, 04:54 PM IST

भोपाल : कोविड जैसी महामारी का बड़ा असर बच्चों की शिक्षा और उनके मन पर पड़ा है। बच्चे शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थ्य रहें और इस मुश्किल समय में तनाव से दूर रह पाएं, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। बच्चों के लिए केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक सभी बेहतरी की कोशिश कर रहे हैं। बच्चों को मानसिक रुप से स्वस्थ्य रखने के लिए राज्यों के साथ मिलकर वेब पोर्टल मनोदर्पण शुरु किया है। इससे शिक्षकों और बच्चों को जोड़ा जा रहा है। वहीं राज्य सरकार से हर स्कूल में खेल मैदान सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। प्रदेश के करीब 40 हजार स्कूल ऐसे हैं जहां पर खेल मैदान की उपलब्धता नहीं है। इन स्कूलों में खेल मैदान की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

स्कूलों में खेल मैदान की स्थिति :
प्रदेश में करीब 1 लाख 22 हजार सरकारी स्कूल हैं। प्रदेश के 79675 स्कूलों में खेल मैदान उपलब्ध हैं। यदि इनमें प्राइवेट स्कूल और अनुदान प्राप्त स्कूलों की संख्या जोड़ी जाए तो खेल मैदान वाले स्कूलों की संख्या 105500 होती है। 13648 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनमें खेल मैदान नहीं हैं लेकिन वे पास के खेल मैदान या नगरीय निकाय के पार्क का उपयोग करते हैं। कुल स्कूल 15148 हैं जो पास के मैदान का उपयोग कर रहे हैं। इस तरह 93323 सरकारी स्कूलों ने खेल के मैदान का इंतजाम कर लिया है। प्रदेश के सभी स्कूलों की संख्या 120648 है जो बच्चों को खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार बाकी के स्कूलों में भी खेल मैदान की संभावनाएं तलाश रही है।

ये है मनोदर्पण :
बच्चों,किशोरों, शिक्षकों और अभिभावकों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए केंद्र सरकार ने मनोदर्पण पोर्टल शुरु किया है। इस पोर्टल से इन सभी को जोड़ा जा रहा है। अभिभावकों के लिए कुछ परामर्श दिए गए हैं। वे हमेशा बच्चों के साथ रहें। उनको सवाल पूछने का पूरा मौका दें। बच्चों को विश्वास दिलाएं कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। बच्चों के अच्छे दोस्त बनें। उन्हें सावधानियां बरतने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को कहानिया सुनाएं, चुटकुले सुनाएं और रचानात्मक कामों में उनका सहयोग करें। माता-पिता कोरोना के बारे में तथ्यों सहित जानकारी रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें। सोशल मीडिया पर समय सीमित करें। हर समय बीमारी के बारे में न सोचें बल्कि सावधानियां अपनाएं। बीमारी से संबंधित जानकारी आपस में साझा करें। सोशल मीडिया पर समय सीमित करें। हर समय बीमारी के बारे में न सोचें बल्कि सावधानियां अपनाएं। बीमारी से संबंधित जानकारी आपस में साझा करें। बच्चों की दिनचर्या में योग और व्यायाम शामिल करें। शिक्षक भी बच्चों से ऑनलाइन बराबर संपर्क में रहें।

Arun Tiwari Reporting
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