
जबलपुर/भोपाल। मप्र हाईकोर्ट (jabalpur high court) ने राज्य सरकार को कहा है कि तीन महीने के अंदर ऑनलाइन गैम्बलिंग (online gambling) पर रोक लगाने के लिए कानून बनाने की ठोस पहल की जाए। जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि देश के युवाओं के आर्थिक, मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को वृहद स्तर पर प्रभावित करने वाले इस मसले में अधिक समय तक इंतजार नहीं किया जा सकता। अगली सुनवाई 30 नवम्बर नियत की गई।
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ऑनलाइन गैम्बलिंग में गंवाए नाना के साढ़े आठ लाख
सिंगरौली जिले के सनत कुमार जैसवाल की जमानत अर्जी पर कोर्ट सुनवाई कर रही थी। सनत पर आरोप है कि उसने अपने नाना के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सरई के खाते से 8 लाख 51 हजार रु अवैध रूप से निकाल लिए। इस रकम को उसने आइपीएल के सट्टे व अन्य ऑनलाइन गैम्बलिंग स्कीमों में लगाकर बर्बाद कर दिया। रिपोर्ट पर भादवि की धारा 420 व अन्य के तहत प्रकरण दर्ज कर पुलिस से 21 दिसम्बर 2021 को गिरफ्तार किया। इसी मामले में जमानत पाने के लिए आरोपी सनत की ओर से यह अर्जी प्रस्तुत की गई।
कोर्ट ने जताई थी कानून की जरूरत
विगत 16 जून को कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में केंद्र सरकार पक्षकार नहीं है, लेकिन गैम्बलिंग एक्ट केंद्रीय कानून है। इसलिए उच्चतम अधिकारियों को इन गैम्बलिंग प्लेटफॉम्र्स की वैधानिक स्थिति की जांच कर शपथपत्र देना चाहिए।
इसी के तारतम्य में केंद्र सरकार की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल पुष्पेंद्र यादव ने कोर्ट को बताया कि गैम्बलिंग व बेटिंग(जुआ व सट्टा) राज्य सूची का विषय है।
राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता जीपी सिंह ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव का शपथपत्र पेश किया। कोर्ट को बताया कि इस मसले पर केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के गृह विभाग के सचिवों की 21 जुलाई 2022 को बैठक बुलाई थी। मामला अब अंतर्राज्यीय एडवाइजरी कमेटी के स्तर पर है। जिसे यह निर्णय लेना है कि इस सम्बंध में क्या कदम उठाए जाएं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के बयान का केंद्र सरकार ने खंडन किया है। लिहाजा राज्य सरकार इस सम्बंध में एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
Updated on:
31 Aug 2022 09:03 am
Published on:
31 Aug 2022 09:01 am
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