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अब कोई नहीं खेल पाएगा PUBG गेम, सरकार लगाने वाली है बैन

अब कोई नहीं खेल पाएगा PUBG गेम, सरकार लगाने वाली है बैन

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अब कोई नहीं खेल पाएगा PUBG गेम, सरकार लगाने वाली है बैन

भोपालः सात राज्यों में प्रतिबंध के बाद अब मध्य प्रदेश में भी PUB G गेम पर रोक लगने जा रही है। विधानसभा सत्र के दौरान सदन में उठे इस गेम से होने वाले नुकसान के मुद्दे को मद्देनज़र रखते हुए सरकार ने इस गेम पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। उम्मीद है कि, जल्द ही मध्य प्रदेश में भी इस गेम को बेन कर दिया जाएगा। कमलनाथ सरकार के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि, इस गेम की लत के चलते लोगों की सेहत पर बड़े नुकसान होने लगे हैं। युवाओं और बच्चों को इस गेम का नशा होता जा रहा है, जिसके चलते सरकार अब इस गेम पर प्रतिंध लगाने जा रही है।

जनसंपर्क मंत्री ने गेम को बताया अफीम

आपको बता दें कि, बीजेपी विधायक यशपाल सिंह ने इस मामले को संज्ञान में लाते हुए इसे विधानसभा में उठाया, जिसपर गहन चिंतन के बाद सरकार ने इसपर प्रतिबंध लगाने का मन बनाया है। मंत्री पीसी शर्मा ने मीडिया बातचीत में कहा कि, PUBG गेम युवाओं और बच्चों पर अफीम की तरह काम कर रहा है। इसकी लत लगने से बच्चे नातो पढ़ाई में मन लगा पा रहे हैं और ना ही युवा काम में मन लगा रहे हैं और सांकेतिक रूप से इस गेम को खेलने वालों में नकारात्मकता काफी तेज़ी से बढ़ रही है। क्योंकि, इस गेम का मूल उद्देश्य ही मार धाड़ पर आधारित है।

लोकप्रीयता का कारण

आपको बता दें कि, लोगों में ‘पबजी गेम’ का क्रेज कितनी तेजी से बढ़ रहा है इसका अंदाजा़ इस बात से ही लगाया जा सकता है कि, लॉच होने के चंद ही दिनों में इस गेम को गूगल प्लेस्टोर पर 50 मिलियन से भी ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। युवाओं का ये क्रेज उनकी मानसिकता को दूषित कर ही रहा है, साथ ही इसकी लत के कारण लोगों में कई बीमारियों ने अपना घर बनाना शुरु कर दिया है। युवा और बच्चे इस गेम को खेलने के इस कद्र आदि होते जा रहे हैं कि दिन-रात फोन के साथ ही चिपके रहते हैं। गेम के टास्क पूरे करने के लिए वह ना तो खाने की परवाह करते हैं और ना ही नींद की।

‘पबजी’ गेम के आकर्षण का मुख्य कारण

गेम के कई तरह के हाईटेक फीचर हैं जिसमें अट्रैक्टिव ग्राफिक्स के साथ-साथ मोशन सेंसरिंग टेक्नोलॉजी और पावरफुल साउंड का इस्तेमाल किया गया है जो बच्चों को अपनी ओर काफी तेज़ी से आकर्षित कर रहा है। लड़कियों से ज्यादा ये गेम लड़के खेलना पसंद कर रहे हैं क्योंकि यह एक एक्शन गेम है, जिसमें मारधाड़ और कूदफांद काफी ज्यादा है।

गेम से हो रहे हैं ये नुकसान

इस गेम की लत ऐसी है कि, इसे खेलने वाला घंटों एक ही पोजिशन में बिना मूवमेंट किये आंखें गढ़ाकर बैठा रहता है। इससे आई साइट पर काफी बुरा असर पड़ता है। गर्दन झुकाकर बैठे रहने से गर्दन दर्द, कुबड़, खाने का ना पचना जैसी दिक्कत आनी शुरू हो जाती है। इसके अलावा अनिद्रा, भूख की कमी, मानसिक परेशानी, परिवार के साथ आपसी तालमेल की कमी, चिढ़चिढ़ापन भी इसी के कारण हो जाते हैं। आइये जानते हैं, इससे होने वाले अन्य नुकसानों के बारे में...।

-अपच व मोटापा
सारा दिन एक ही जगह पर बैठे रहने से शरीर में किसी तरह की मूवमेंट नहीं होती नतीजा खाना -पीना पहुंचाने में दिक्कत आने लगती हैं। बच्चे एक ही जगह पर बैठे-बैठे खा लेते हैं जो मोटापा का भी कारण बन सकती है।

-आंखों की कमजोरी
मोबाइल की नीली रोशनी वैसे ही आंखों के लिए हानिकारक मानी जाती हैं वहीं लगातार कई घंटों तक गेम के लिए नजरे गढ़ाए रखने से आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती हैं।

-अनिद्रा की परेशानी
गेम को खेलने के लिए बच्चा कई घंटे बिता देता है। इसके टास्क को जीतने के लिए उनका क्रेज बढ़ता जाता है और वे नींद की भी अनदेखी कर देता है। धीरे-धीरे यह आदत उसे अनिद्रा की शिकार बना देती है।

-डिप्रेशन व मानसिक तनाव
बच्चे में मानसिक तनाव और डिप्रेशन का कारण भी वीडियो गेम है। सारा दिन गेम खेलने औक जीतने की सोच उसे तनाव की तरफ धकेलती है।

-हिंसक स्वभाव
गेम में लड़ाई और मार-धाड़ एक्शन, बच्चे के स्वभाव को हिंसक बना रहा है। गेम में बने टास्क की तरह बच्चा असल जीवन में भी वैसा ही व्यवहार करने लगता है। उसके व्यवहार में चिड़िचिड़ापन, अकेलापन और सहनशीलता की कमी होने लगती है। गेम की तरह वह अपने आस-पास के लोगों से भी हिंसक व्यवहार करने लगता है।